BJP को मिली मोदी फार्मूले पर चलने की नसीहत
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उत्तराखंड भाजपा की तीन दिनी कार्यसमिति प्रदेश के नेताओं को आगे बढ़ने का मंत्र और सबक दे कर गई। पार्टी नेताओं को मोदी फार्मूले पर चलने का जज्बा पैदा करने और माइंड सेट बदलने की नसीहत मिली है।
हालांकि प्रदेश भाजपा ने सरकार को घेरने का जो खाका बैठक में खींचा है उसमें बासीपन साफ झलका। जिन मुद्दों के साथ भाजपा आगे बढ़ने का प्लान तैयार कर रही है उसे लंबे समय से भाजपा नेता विधानसभा और अन्य मंचों से उठाते आए हैं। प्रदेश कार्यसमिति की अगली बैठक दिसंबर में प्रस्तावित है।
बैठक के अंतिम दिन भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल ने अपने एक घंटे के भाषण में भाजपा नेताओं को फटकारा भी और पुचकारा भी। उन्होंने नेताओं को मोदी का मैकेनिज्म समझाया।
उन्होंने कहा कि हर भाजपाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह लक्ष्य तय कर काम करे। सकारात्मक सोच के साथ जीत का माइंड सेट लेकर आगे बढ़े। पार्टी में परिवारवाद को रोको और पार्टी को परिवार की तरह समझो।
आपदा पर अपना विजन बड़ा करें
उन्होंने कहा कि देश के गरीब, किसान और मजदूर की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करो। इस देश के कल्याण के लिए मोदी फार्मूला ही फिट बैठता है।
इसलिए आगे बढ़ने का इससे बेहतर मंत्र और कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मुस्कुराने की कला सिर्फ आदमी को मिली है इसलिए इसे जज्बे के साथ आगे बढ़ें।
कार्य समिति की बैठक में दैवी आपदा पर प्रस्ताव रखा गया। जिसमें अवैध खनन और प्रदेश में अस्थिरता का सवाल भी उठाया गया।
प्रस्ताव में बड़ी चूक दिखी क्योंकि आपदा के प्रस्ताव में सब कुछ वही था जो कि भाजपा नेता लगातार कहते आए हैं। पार्टी को आपदा पर अपना विजन बड़ा करके सोचना होगा तभी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा जा सकता है।
जनांदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान
अगली कार्यसमिति की बैठक तक भाजपा आने वाले महीनों में क्या करेगी इसका भी स्पष्ट उल्लेख प्रदेश के नेता बैठक में नहीं कर सके। प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कार्यकर्ताओं से जनांदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह की घटनाएं महिलाओं के साथ दिल्ली में हो रही है वैसी ही उत्तराखंड में भी हो रही हैं। सरकार कानून व्यवस्था पर लगाम लगाने में फेल है।
न सिर्फ प्रदेश के मैदानी बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी हत्याओं की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि तेरा-मेरा छोड़ दो फिर देखो क्या हो सकता है। लेकिन यह देखा जाना बहुत जरूरी है कि प्रदेश भाजपा आज गुटबाजी के जिस मोड़ पर है उसका गुनहगार कौन है।
क्योंकि भविष्य के लिए यह पड़ताल होना भी जरूरी है। भाजपा की गुटबाजी समाप्त कराने के लिए केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भेजे गए दोनों नेताओं ने बाद में प्रदेश अध्यक्ष और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर कड़े फैसले लेने की हरी झंडी भी दी है।
नमो-नमो के चक्कर में भूल गए पहाड़ के मुद्दे
भाजपा ने खूब राग अलापा और कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया लेकिन पार्टी पहाड़ के मूल मुद्दों से भटक गई। न कहीं पलायन की बात हुई और न ही अवस्थापना से जुड़े पहलुओं का जिक्र हुआ।
जबकि नरेंद्र मोदी ने रुद्रपुर में आयोजित चुनावी रैली में खुद ही कहा था कि पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के ही काम आए, ऐसी योजना बनाएंगे। प्रदेश भाजपा कार्य समिति में तीन दिन तक नमो-नमो तो होती रही लेकिन ऐसे किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं की।
ऐसा कोई प्रस्ताव भी पार्टी के एजेंडे में नहीं था जिससे पहाड़ में रोजगार के अवसर पैदा करके पलायन रोका जा सके। पहाड़ की खेती बाड़ी का तो जिक्र ही नहीं हुआ। कृषि उत्पादकता कैसे बढ़ेगी और कृषि उत्पाद को कैसे बाजार तक ले जाया जाए इसका कोई प्रस्ताव या सुझाव भाजपा के पास नहीं था।
नेता तीन दिन तक मोदी जाप करने के अलावा कांग्रेस को कोसने का काम करते रहे। राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल के भाषण में तो दर्जनों बार मोदी का गुणगान हुआ लेकिन मोदी पहाड़ के लिए जो दृष्टि रखते हैं वह भाजपाइयों को नजर नहीं आई।