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नए नवेले भाजपाइयों में सियासी भविष्य को लेकर चिंता

Sun, 01 Jan 2017 02:43 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 01 Jan 2017 02:43 PM IST
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BJP new members Anxiety about the future political.
बागी - फोटो : file photo

विधायकी छोड़ कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए दिग्गज नेता प्रधानमंत्री द्वारा आपदा घोटाले का जिक्र करने से सकते में हैं। भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो इसकी चिंता को लेकर बागियों में मंथन मनन भी शुरू हो गया है। 

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चिंता यह सता रही है कि पुराने भाजपाई आगे भी अपने सियासी नफा नुकसान के चलते बेवजह ऐसे मामलों को तूल न देने लग जाएं। सूत्र बताते हैं इस पूरे प्रकरण के बाद ‘बागियों’ में आपसी एका पर भी जोर दिया जा रहा है।
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परेड मैदान में 27 दिसंबर को आयोजित परिवर्तन महारैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने भाषण में ‘उत्तराखंड में तो स्कूटर भी पैसे खाता है..’ जिक्र करने से राज्य की सियासत गर्म है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के शासनकाल में हुए आपदा राहत घोटाले के जिन्न ने प्रदेश की राजनीति को नए मोड़ पर ला दिया है। इसे लेकर जहां भाजपा कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है, वहीं ‘बागियों’ में भी कसमसाहट है। 

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अपने अपने हिसाब से आंक रहे आशंका

BJP new members Anxiety about the future political.

इन नये नवेले भाजपाइयों में अपने सियासी भविष्य को लेकर चिंता भी है। हर कोई नेता इसके आगे की आशंका को अपने-अपने हिसाब से आंक रहे हैं। सूत्रों के हवाले से कुछ बागी नेताओं ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि जब प्रधानमंत्री ने भरी जनसभा में अपने ही पाले में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पर अप्रत्यक्ष रूप से उस घोटाले पर सवाल उठा दिया जिस पर जांच में घोटाला न होने की पुष्टि खुद मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट में हो गई है। 

ऐसे में क्या गारंटी है कि कल को भाजपा के कोई पुराने दिग्गज अपने सियासी नफा-नुकसान को भांपकर फाइलों में उनसे जुड़े मुद्दों को बेवजह बाहर निकाल कर नई मुसीबत न खड़ी कर दें। इसमें पॉली हाउस, करोड़ों की जमीन कब्जाने या फिर व्यापारी के उत्पीड़न व खुदकुशी जैसे मामलों पर किसी तरह की शरारत को लेकर सभी आशंकित हैं। 

सूत्रों का कहना है कि कुछ नेताओं ने दिल्ली दरबार तक भी मजबूती से अपनी बात पहुंचा दी है। भाजपा नेतृत्व के सामने धर्म संकट यह है कि जब स्वयं प्रधानमंत्री ने ही आपदा घोटाले के जिन्न को बाहर निकाला है, तो ऐसे में आखिर इसका विरोध कर बिल्ली के गले में घंटी बांधने का साहस कौन करे?

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