उत्तराखंड में CBI जांच की आंच से खुद 'झुलस' सकती है भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनएच-74 के घोटाले की सीबीआई जांच के जरिए भाजपा एक तीर से कई निशाने साधती दिखाई दे रही है। सीबीआई जांच की जिस तेजी से संस्तुति हुई, उससे खुद सरकार में बैठे मंत्रियों का भी दबाव में आना तय है।
एनएच का घोटाला ऊधमसिंह नगर की भाजपा की सियासत में खिचड़ी पकने का इशारा भी कर रहा है। कांग्रेस इसकी जद में कितना आएगा यह तो समय बताएगा, लेकिन यह भी साफ है कि जांच के दायरे में विस्तार होने पर इस घोटाले की कई ओर परतें भी उघड़ कर सामने आएंगी। विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय नेताओं के दबाव की बात कहकर इनकी दबी परतों को उघाड़ने का काम कर ही चुके हैं।
एनएच-74 के घोटाले की जद में रुद्रपुर, बाजपुर, जसपुर, सितारगंज, काशीपुर आदि विधानसभाएं मुख्य रूप से आ रही हैं। विधानसभा चुनाव के बाद अब ऊधमसिंह नगर की जसपुर को छोड़ कर बाकी सभी विधानसभाओं पर भाजपा का कब्जा है। इसके साथ ही इस जिले के दो भाजपा नेताओं की आपस की खींचतान भी जगजाहिर है।
भाजपा के मंत्रियों पर दबाव बनना तय
ऐसे में अरविंद पांडेय का मुखर होना भी भाजपा के अंदर की सियासी खींचतान का एनएच के बहाने परवान चढने का संकेत कर रही है। यह भी साफ है कि जिस तरह से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीबीआई जांच की संस्तुति की है, उससे खुद भाजपा के मंत्रियों पर दबाव बनना तय है।
कुछ दिन की भाजपा सरकार के कई मंत्री जांच की बात कर चुके हैं। सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने हल्दूचौड़ की सोयाबीन फैक्ट्री पर जांच बिठाई तो समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य छात्रवृत्ति मामले में जांच की बात कर रहे हैं। प्रदेश में हर नई सरकार के सामने अफसरशाही को शिकंजे में लेने की चुनौती भी रही है। एनएच-74 घोटाले में अफसरों के नाम ही सामने आए हैं।
ऐसे में इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अफसरशाही को भी सख्त संकेत देने की कोशिश की है। माना यह जा रहा है कि भाजपा की यह कोशिश कांग्रेस पर शिकंजा कसने की है। हालात बता रहे हैं कि आयातित कांग्रेसियों से संपन्न भाजपा खुद भी इसकी आंच में झुलस सकती है।