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उत्तराखंड सीएम के नजदीकियों ने खोल रखी है 'दुकान'

Sun, 09 Oct 2016 05:17 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 09 Oct 2016 05:17 PM IST
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bjp leader trivendra rawat interview
त्रिवेंद्र सिंह - फोटो : AmarUjala

कोश्यारी, निशंक और खंडूड़ी के बाद प्रदेश भाजपा में अगली पीढ़ी के नेताओं की चर्चा होती है तो उनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम काफी ऊपर माना जाता है। युवा होने के साथ-साथ उत्तराखंड के अलावा राष्ट्रीय स्तर की राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले रावत इस बार पूरे फॉर्म में नजर आ रहे हैं।

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सामान्य चुनाव के बाद उपचुनाव में हार का स्वाद चखने के बाद अबकी बार उन्होंने अपनी तैयारियां बदली हैं। चर्चा तो यह भी है कि अगर भाजपा सरकार बनाने में कामयाब होती है तो मुख्यमंत्री के पद पर उनकी दावेदारी प्रबल है। साफ-सुथरी राजनीति करने के लिए पहचाने जाने वाले त्रिवेंद्र रावत ने अपनी इस विशेषता का प्रमाण सियासी संकट पैदा करने के लिए हुई जोड़तोड़ से दूरी बनाकर भी दिया था। अमर उजाला के स्टेट ब्यूरो चीफ संजय त्रिपाठी के साथ त्रिवेंद्र सिंह रावत की खास बातचीत में ऐसे ही तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई।
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आप लगातार दो चुनाव हारे हैं, लोग कहते हैं, अपनों ने ही काम लगा दिया था? 
- यह सब बातें हम भूल चुके हैं। जिन लोगों से जो भी गिले-शिकवे थे, सब दूर हो गए हैं और अब हम सब एक हैं। इन बातों को कुरेदने से अब कोई लाभ नहीं अलबत्ता नुकसान ही होगा।
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आपके बीच के लोगों की मानें तो उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी मित्र विपक्ष की भूमिका में नजर आती है?
- कांग्रेस के लोग इस तरह की बातें मीडिया के माध्यम से फैला रहे हैं। भ्रष्टाचार, शराब का अवैध व्यापार, खनन समेत अन्य सभी मुद्दों पर हम सरकार को घेरते रहे हैं। मुख्यमंत्री की बेहिसाब घोषणाओं के पूरे न होने पर भी निंदा और आलोचना की गई है।

गुटबाजी की बातें खुलकर सामने आ गई हैं। खंडूड़ी-कोश्यारी की क्या व्यथा है?
- जहां तक मुझे पता है, उनकी कोई निजी व्यथा नहीं है। सभी संगठन के बारे में सोचते हैं। कोश्यारी और खंडूड़ी दोनों ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हैं। निजी महत्वाकांक्षा या पीड़ा नजर नहीं आती है। कुछ हद तक मतभेद हर जगह होते हैं, जिन्हें भूलकर चुनाव लड़ा जाएगा।

आंतरिक झगड़े का दौर सा चल गया है, जिसमें भाजपा भी बुरी तरह उलझी है?
- मैं यह मानता हूं कि आपसी झगड़े से नुकसान बहुत होता है। मगर ऐसे मौके पर पार्टी नेतृत्व की भूमिका अहम होती है, जो विवाद समाप्त करने की कोशिश करता है। एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना चाहिए। मतभेद हो सकते हैं, मगर मनभेद कहीं नहीं हैं।

कभी जिनके खिलाफ मोर्चा खोला करते थे और अब वे पार्टी में हैं। चुनाव में भाजपा के पास कांग्रेस के खिलाफ मुद्दों का अकाल सा नजर आता है?
- बाहर से जो लोग भाजपा में शामिल हुए हैं, उनकी स्वीकार्यता बन चुकी है। जहां तक मुद्दों के अकाल की बात है तो उसके लिए कांग्रेस के घोषणावीर मुख्यमंत्री हरीश रावत ही काफी हैं। सीएम के नजदीकियों ने दुकान खोल रखी है। कोई भी आदमी अपना फंसा हुआ काम सीधे इन लोगों के जरिए करवा सकता है।

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हरीश रावत - फोटो : Self

सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कांग्रेस के नेता सुबूत मांग रहे हैं?
- उत्तराखंड की धरती फौजी पैदा करती रही है। यहां औसत प्रत्येक घर से एक आदमी सेना में है। कांग्रेस के जो भी नेता सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांग रहे हैं चाहें वे किशोर उपाध्याय हों या संजय निरूपम, उन्होंने सेना के मनोबल को तोड़ने का काम किया है। वक्त रहते इन सभी को जनता सबक सिखाएगी।

उत्तराखंड में भाजपा मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित कर रही है, क्या कोई खास वजह है?
- चेहरा घोषित करना या न करना रणनीतिक मुद्दा है। हमने हरियाणा, महाराष्ट्र समेत तमाम राज्यों में कोई चेहरा सामने नहीं किया लेकिन फिर भी सरकार बनाई। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चेहरा घोषित किया था, फिर भी हम मामूली अंतर से सरकार बनाने से रह गए। दिल्ली में चेहरा था फिर भी सरकार नहीं बनी।

आप पिछले कई सालों से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। अमित शाह के साथ काम किया, क्या सीखा?
- बीजेपी में सामूहिक निर्णय करने की परंपरा है। प्रत्येक मुद्दे पर सभी लोग मिल-बैठकर विचार-विमर्श करते हैं और अध्यक्ष निर्णय करते हैं। कई बार आवश्यकता पड़ने पर मुद्दों को फील्ड में लेकर जाते हैं। कई राज्यों में काम करने का अनुभव मिला है, जिसका भरपूर इस्तेमाल उत्तराखंड में करेंगे।

बहुमत मिलने पर आप मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं ?
- मैं मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं हूं। एक साधारण कार्यकर्ता की हैसियत से काम कर रहा हूं। पार्टी हाईकमान की ओर से जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनका पालन कर रहा हूं। मैं अपने आप को ऐसी किसी रेस का हिस्सा नहीं मानता हूं।

2017 में भाजपा सरकार बनाने की हैसियत में रहेगी?
- निश्चित रूप से अगली सरकार भाजपा की होगी। उत्तराखंड की जनता कांग्रेस के भ्रष्टाचार और घपले-घोटालों से त्रस्त है। जिस तरह हरीश रावत ने घोषणाएं कर-करके लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है, उससे जनता अनजान नहीं है। भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।

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