फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   birds change their language.

जगह बदलते ही बदल जाती है परिंदों की जुबान

Sun, 27 Dec 2015 05:48 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 27 Dec 2015 05:48 PM IST
विज्ञापन
birds change their language.

हर ‘चालीस कोस’ पर बोली बदल जाने की कहावत परिदों पर भी सटीक बैठती है (एक कोस = 2.25 मील)। यही नहीं एक ही प्रजाति का पक्षी अलग-अलग माहौल में अपनी जुबान भी बदलता है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा परिंदों की आवाज के डीकोडिंग में यह खुलासा हुआ है।

विज्ञापन


जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अब तक 230 प्रजाति के पक्षियों की आवाज रिकार्ड की है और एक सोनोग्राम तैयार किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक भाषा की फ्रीक्वेंसी से तैयार सोनोग्राम की डिकोडिंग से हुए खुलासे चौंकाने वाले हैं। अध्ययन में पाया गया है कि पक्षियों की बोली में ठीक वैसी ही संवेदनाएं होती हैं जो इंसानों की बोलियों में हैं।
विज्ञापन


भौगोलिक स्थिति, समय, काल के मुताबिक जिस तरह इंसानों की क्षेत्रीय बोलियां बदलती हैं उसी तरह पक्षियों की बोलियां भी अपडेट होती हैं। संस्थान का दावा है कि यह पहली बार है जब ट्रांस हिमालयन क्षेत्र के पक्षियों पर ऐसा काम हुआ है। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले सौ पक्षियों में से 35 की आवाज रिकार्ड की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विज्ञानी डॉ. अनिल कुमार कई वर्षों की मेहनत केबाद पक्षी संसार की भाषा समझ पाए हैं। अध्ययन में बताया गया कि सबसे आसान भाषा छोटा बच्चा बोलता है। इसकी ध्वनि की फ्रीक्वेंसी बहुत कम होती है जबकि मेटिंग सीजन में पक्षी सबसे जटिल भाषा बोलते हैं।

ऐसे किया गया अध्ययन

birds change their language.

पक्षियों की आवाज रिकार्ड करने के बाद इसे जर्मनी केएवी सॉफ्टवेयर में लोड किया जाता है। इससे फ्रीक्वेंसी की विभिन्न आकृतियां जिन्हें सोनोग्राम कहते हैं बन जाती हैं। इन्हीं सोनोग्राम से ध्वनि फ्रीक्वेंसी को डिकोड किया जाता है और निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

‘दूरी बढ़ने केसाथ पक्षियों की बोलियों में अंतर आने लगता है। दूरी जितनी ज्यादा होती है अंतर उतना ही स्पष्ट होता जाता है। पक्षियों के सिग्नल एक दिन में नहीं बने। डीएनए केमाध्यम से ये एक से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं। पक्षियों के सिग्नलों का प्रकार और उनका मतलब समझने में लंबा समय लगता है।’
- डॉ. अनिल कुमार (वरिष्ठ पक्षी ध्वनि विशेषज्ञ, जूलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया)

अध्ययन की खास बातें

1. हर पक्षी एक ही तरह का गीत नहीं गाता।
2. पक्षियों की ध्वनि अमूमन 40 हर्ट्ज से 20 किलो हर्ट्ज के बीच होती है।
3. अलार्म कॉल: कोई खतरा आने पर पक्षी यह आवाज निकालते हैं।
4. डिस्ट्रेस कॉल: शिकारी केपंजे में फंसने पर इस आवाज को निकालते हैं।
5. बेगिंग कॉल : भूख लगने पर बच्चे मां को बुलाने केलिए यह ध्वनि निकालते हैं।
6. मेटिंग सीजन में अलंकारिक भाषा बोलने वाले नर पक्षी से मादाएं ज्यादा आकर्षित होती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed