चारधाम यात्रा मार्ग पर बनेंगे बायो डाइजेस्टर शौचालय
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उम्मीद है कि अगले साल चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु बायो डाइजेस्टर शौचालय इस्तेमाल कर सकेंगे। पर्यटन विभाग ने करीब 33.69 करोड़ रुपये का संशोधित प्रस्ताव हाल ही में केंद्र सरकार को भेजा है।
मंजूरी मिलते ही यात्रा मार्ग पर 121 स्थानों पर शौचालयों का स्थाई निर्माण किया जाएगा। इन शौचालयों की खासियत यह है कि इको फ्रेंडली होने के अलावा इनमें बदबू नहीं होती है। अभी तक चारधाम यात्रियों के लिए सरकार प्रत्येक साल अस्थाई शौचालयों का निर्माण कराती है।
आने वाले साल में यात्रा सीजन के दौरान फिर शौचालयों का निर्माण कराना पड़ता है। इससे प्रत्येक वर्ष बड़ी धनराशि अस्थाई शौचालयों पर खर्च हो जाती है। इसी के मद्देनजर बायो डाइजेस्टर शौचालयों के निर्माण का फैसला लिया गया। एक बार निर्माण हो जाने के बाद सालों तक बिना किसी खास मेंटीनेंस के इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
शौचालयों के निर्माण का रास्ता लगभग साफ
पर्यटन विभाग ने करीब छह माह पहले नमामि गंगे योजना के तहत चारधाम यात्रा मार्ग पर बायो डाइजेस्टर शौचालयों के निर्माण के लिए कार्ययोजना भेजी थी। इस पर केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाकर इसे वापस भेज दिया था। इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
विभाग ने करीब दो सप्ताह पहले केंद्र की ओर से उठाई गई आपत्तियों के मद्देनजर संशोधित कार्ययोजना पुन: भेज दी है। चूंकि केंद्र की आपत्तियों को दूर कर दिया गया है, इसलिए ऐसे शौचालयों के निर्माण का रास्ता लगभग साफ दिख रहा है। केंद्र को भेजी गई 33.69 करोड़ रुपये की कार्ययोजना में कुल 462 शौचालयों के अलावा 102 मूत्रालयों को बनाने का प्लान है। इनकी मंजूरी के बाद प्रत्येक पांच-छह किमी पर बायो डाइजेस्टर वाले शौचालयों की सुविधा यात्रियों को मिल सकेंगी।
क्या हैं बायो डाइजेस्टर शौचालय
पूरी तरह इको फ्रेंडली इन शौचालयों में सीवर लाइन की जरूरत नहीं होती है। यह डी-कंपोजीशन व्यवस्था पर आधारित होते हैं। इसमें मौजूद बैक्टीरिया तेजी से अपना काम कर मल-मूत्र का निस्तारण कर देते हैं। इन शौचालयों से बदबू भी नहीं आती है। इनका रखरखाव भी कोई खास नहीं होता है। यह किसी भी जलवायु, भौगोलिक परिस्थियों में कारगर है। यहां तक कि सियाचिन जैसे बेहद बर्फीले इलाके में भी यह कामयाब रहा है।