उत्तराखंडः CMO ऑफिस से चल रहा था गोरखधंधा, सर्वे में खुली पोल
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सीएमओ कार्यालय स्तर से हुए टेंडर की आड़ में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकारियों ने सरकारी खजाने में जमकर लूट खसोट की है।
आलम यह है कि पिछले कई सालों से अस्पताल में लगभग सभी सामान बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस गोरखधंधे का खुलासा अस्पताल के ही कुछ अधिकारियों की सतर्कता से हुआ है। वहीं सीएमओ कार्यालय स्तर से होने वाली सभी खरीदों में इस तरह की गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में खरीदारी की आड़ में सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की जा रही है। आलम यह है कि 350 रुपये मूल्य की यूरिन प्रोटीन टेस्ट (यूटीपी) किट अस्पतालों में 1400 रुपये में खरीदी जा रही है। पांच लीटर का जो डिस्टिल्ट वाटर बाजार में सौ रुपये में बिक रहा है, उसे अस्पताल दो सौ रुपये में खरीद रहे हैं।
गोरखधंधे का खुलासा
इसके अलावा 1200 रुपये मूल्य का हेपाकार्ड 2500 रुपये में खरीदा जा रहा है। यही नहीं, लगभग सभी सामान दो से चार गुना तक ज्यादा कीमत पर खरीदा जा रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डा. केके टम्टा ने बाजार में सर्वे कराया।
उन्होंने अस्पतालों में खरीदे जा रहे सामान का बाजार भाव पता करवाया तो इस बड़े गोरखधंधे का खुलासा हुआ। शनिवार को उन्होंने टेंडर कीमत पर सामान खरीदने पर रोक लगा दी। साथ ही उन्होंने अन्य सामान की कीमत का भी बाजार में सर्वे कराने के निर्देश दिए।
जिले भर के अस्पतालों में सीएमओ कार्यालय से हुए टेंडर के अनुसार ही खरीद होती है। ऐसे में साफ है कि सभी अस्पतालों में इस तरह का गोरखधंधा चल रहा है। राजधानी में कई-कई गुना ज्यादा कीमत पर सामान खरीदे जाने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई।
बाजार और टेंडर रेट में अंतर (रुपये में)
वस्तु-बाजार भाव-टेंडर रेट
हेपाकार्ड-1200-2500
डिस्टिल्ड वाटर-100-200
एचसीए एलाइजा-2350-4000
ईडीटीए ट्यूब-200-400
ग्लास स्लाइड-35-80
यूपीटी-350-1400
टेंडर में चल रही पूलिंग
नियमानुसार टेंडर में सबसे कम कीमत देने वाली कंपनी को काम दिया जाता है। इसका फायदा उठाते हुए सप्लाई करने वाले फर्मों के ठेकेदार आपस में पूल बना लेते हैं। जिस ठेकेदार को काम लेना होता है, उसको छोड़कर अन्य सभी ज्यादा कीमत देते हैं। सबसे कम कीमत लगाने वाला ठेकेदार अपनी मनमर्जी के रेट लगाता है। अलग-अलग होने वाले टेंडर में वही गिने-चुने ठेकेदार शामिल होते हैं।
मैंने हाल ही में पदभार संभाला है। टेंडर और खरीद उससे पहले हुई है। इस पूरे मामले को दिखवाया जाएगा। जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
- डा. वाईएस थपलियाल, प्रभारी सीएमओ