गंगोत्री ग्लेशियर में हो रहे इस बड़े बदलाव से खड़ा हो सकता है जल संकट, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
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गंगोत्री ग्लेशियर में हो रहे इस बड़े बदलाव के कारण भविष्य में जल संकट से पैदा हो सकता है। जल पुरुष सचिदानंद भारती ने कहा कि जैव विविधता पानी पर निर्भर करती है। गोमुख ग्लेशियर पर आज तक सबसे अधिक अध्ययन हुए हैं।
आंकड़े बता रहे हैं कि गोमुख ग्लेशियर हर साल 20 से 22 फुट पीछे खिसक रहा है, जो चिंताजनक है। यदि भविष्य में जल संकट से निपटना है तो पहाड़ों में पानी को रोकने के ठोस कदम उठाने होंगे।
हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान, उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद् एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से ‘भारत में जैव विविधता संरक्षण, मुद्दे, चुनौतियां समाधान एवं दूरस्थ शिक्षा की भूमिका’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सचिदानंद ने जंगलों को आग से बचाने के लिए चाल खाल को जरूरी बताया।
इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी दी कि भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को कैसे बचा जा सकता है। सेमिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एनपीएस बिष्ट ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं पर्यावरण संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कहा कि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र प्रदेश के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों मसलन जल, जंगल व जमीन का उपग्रहों के माध्यमों से आंकडे़ एकत्र करता है। जिसके जरिए योजनाएं बनाने में आसानी हुई है। विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया।