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समाचार पत्र वितरकों को सरकार का एक और तोहफा

Tue, 07 Jun 2016 01:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 07 Jun 2016 01:26 AM IST
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bicycle to Newspaper distributors in uttarakhand.
हरीश रावत - फोटो : फाइल फोटो

समाचार पत्र वितरकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अमर उजाला के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। समाचार पत्र वितरकों को औद्योगिक कामगारों की श्रेणी में लाने के बाद मंत्रिमंडल ने मैदानी क्षेत्र के वितरकों को साइकिल तथा पर्वतीय क्षेत्रों के वितरकों को रेनकोट, छाता एवं गम बूट देने का निर्णय लिया है।

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उत्तर प्रदेश में समाचार पत्र वितरकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होने के बाद अमर उजाला ने बीते वर्ष उत्तराखंड में इसके लिए मुहिम शुरू की थी। राज्य सरकार ने समाचार पत्र वितरकों के हित में उठाए गए प्रयासों का संज्ञान लिया।
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औद्योगिक कामगार की श्रेणी में आए खनिज
मंत्रिमंडल ने समाचार पत्र वितरकों को औद्योगिक कामगारों की श्रेणी में लाने का निर्णय लिया, जिसके बाद औद्योगिक विकास विभाग ने फैक्ट्री वर्क्स एक्ट में संशोधन कर सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले सभी लाभ समाचार पत्र वितरकों को देने की अधिसूचना जारी की थी। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए समाचार पत्र वितरकों को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के तहत पौने दो लाख रुपये का बीमा कवर दिए जाने के लिए प्रयास भी सार्थक रहे।
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सभी जनपदों के सीएमओ कार्यालयों पर समाचार पत्र वितरकों का बीमा योजना के तहत पंजीकरण किया गया। समाचार पत्र वितरकों को सामाजिक सुरक्षा के अधिक से अधिक लाभ दिलवाने के लिए आशा मनोरमा डोबरियाल के नेतृत्व वाले उत्तराखंड कामगार महासंघ संगठन ने प्रदेश भर के समाचार पत्र वितरकों को एकत्रित कर सीएम का आभार जताया था।


इतना ही नहीं आशा मनोरमा डोबरियाल ने राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल केके पाल को समाचार पत्र वितरकों को सुविधाएं देने के लिए मांग पत्र सौंपा था। अब सरकार ने मानसून से पहले समाचार पत्र वितरकों को एक और तोहफा दिया है। मैदानी क्षेत्रों में समाचार पत्र वितरकों को साइकिल दी जानी है जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में जहां साइकिल चलाना संभव नहीं है वहां रेनकोट, छाता और गम बूट दिया जाएगा।

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