प्रताड़ना से भरा है भोजन माता का हाल
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महंगाई के दौर में महज पंद्रह सौ रुपए पगार। स्कूल में बच्चों के लिए बढ़िया तरीके से खाना बनाने की जिम्मेदारी।
काम पर बने रहना है तो स्कूलों में अक्सर होने वाली गुरुजनों की पार्टियों के लिए खाना तैयार करने का भी अतिरिक्त जिम्मा। रविवार को दूर दराज के क्षेत्रों से देहरादून में आयोजित रैली में शामिल होने दून पहुंची भोजन माताओं ने उत्पीड़न की कुछ ऐसी ही दास्तां सुनाई।
भोजन माताओं ने बताया कि स्कूलों में मिड डे मील बनाने की जिम्मेदारी होने की वजह से वे आजीविका के लिए दूसरा काम भी नहीं कर पाती हैं। जितना पैसा मिलता है उसमे गुजारा नहीं हो पाता। चकराता और विकासनगर के स्कूल से आई भोजन माताओं ने बताया कि स्कूलों में अक्सर होने वाली पार्टियों में भी उन्हें भोजन बनाने का काम करना पड़ता है।
इनकार करने पर गुरुजन जबरन उनके काम में नुक्स निकालने लगते हैं और प्रताड़ित किया जाता है। काम से हटाने और मानदेय रोकने की धमकी भी दी जाती है। यही नहीं कई बार मानदेय देने में भी गड़बड़ी की जाती है।
भोजन माताओं ने मांगा 3000 मानदेय
मानदेय बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों पर भोजन माताओं ने जिला मुख्यालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। संगठन ने 1500 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए मानदेय दिए जाने की मांग उठाई। रविवार को देहरादून और हरिद्वार जिले की भोजन माताएं उत्तराखंड भोजन माता संगठन के बैनर तले परेड ग्राउंड में एकत्र हुईं।
परेड ग्राउंड से दून चौक होते हुए जिला मुख्यालय तक रैली निकाली। सिटी मजिस्ट्रेट गिरीश गुणवंत भोजन माताओं से वार्ता करने पहुंचे। संगठन ने सिटी मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
भोजन माताओं ने 10 महीने की जगह 11 महीने का मानदेय देने की मांग की। संगठन के संरक्षक जगदीश गुप्ता ने बताया कि अगर मांगों पर अमल नहीं हुआ तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा।
इस दौरान रामकरण सिंह पाल, नारायण सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष उषा देवी, महामंत्री बिट्टो देवी, विकासनगर ब्लाक अध्यक्ष प्रमिला चौहान, हरिद्वार से सपना रतूड़ी, चंपा, बाला, नागो देवी आदि शामिल रहे।
दुर्गम क्षेत्र में तो भोजन माताओं की स्थिति बहुत दयनीय है। उन्हें लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ता है। स्कूलों में अधिकारियों के दौरे की बात कहकर पार्टियों का खाना बनाने के लिए कहा जाता है। हरिद्वार के कई स्कूलों की भी यही स्थिति है। सरकार को ऐसी प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
- जगदीश गुप्ता, संरक्षक, उत्तराखंड भोजन माता संगठन