अहोई व्रत से एक दिन पहले ही विधवा मां से छिन गया दोनों बेटों का साथ, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
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मां अपने बेटों के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही मां के केलेजे के टुकड़े काल के गाल में समा गए। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए बाइक सवार दो सगे भाइयों की उपचार के दौरान मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर से अत्यधिक रक्तश्राव बताया गया है। पुलिस की माने तो अगर दोनों ने हेलमेट पहना होता तो उनकी जान बच सकती थी। दोनों भाइयों की मौत से बड़े भाई, विधवा मां और बहन के अलावा दो छोटी बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जनपद मुरादाबाद थाना भगतपुर के ग्राम फिरोजपुर निवासी रामअवतार की पुत्री परमजीत कौर का विवाह वर्ष 2012 में आईटीआई थाना क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ी में हुआ है। चार वर्ष पहले वह ग्राम प्रधान चुनी गईं, इसी बीच पति चमकौर की मौत हो गई। ऐसे में कामकाज में हाथ बंटाने के लिए परमजीत के दोनों भाई आकाश (20) और चिराग (15) उसके साथ ही रहने लगे थे।
सोमवार शाम चिराग की तबियत खराब थी, भाई आकाश उसे दवा दिलाने के लिए आलूफार्म स्थित एक डॉक्टर के क्लीनिक पर ले गया। दवाई लेने के बाद दोनों भाई देर शाम बाइक से बहन के घर वापस लौट रहे थे। दोनों लोहिया पुल स्थित बरखेड़ा राजपूत के पास पहुंचे होंगे तभी सामने से आ रहे अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
विधवा बहन के साथ रहते थे दोनों भाई
हेलमेट न होने से दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उन्हें चामुंडा स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने आकाश को मृत घोषित कर दिया, जबकि उसके भाई चिराग की कुछ देर बाद उपचार के दौरान मौत हो गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद दोनों भाइयों के शव परिजनों को सौंप दिए। दोनों के बड़े भाई दीपक ने बताया कि पिता रामअवतार की पांच वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। परिवार में मां किरन देवी, विधवा बहन परमजीत कौर के अलावा छोटी बहन ज्योति (17), रोशनी (12) हैं।
ग्राम बरखेड़ी के उप ग्राम प्रधान हरजिंदर सिंह ने बताया कि प्रेम विवाह करने के चलते ग्राम प्रधान परमजीत कौर के ससुराल वाले उन्हें पंसद नहीं करते थे। तीन वर्ष पहले पति चमकौर सिंह की मौत के बाद से परमजीत का अपने ससुरालियों के साथ विवाद रहने लगा। बहन की देखरेख के लिए मायके पक्ष के लोग अक्सर उसके घर आते-जाते रहते थे। दोनों भाई आकाश व चिराग उसके घर पर ही रहते थे। जबकि बड़ा भाई दीपक अपने गांव में ही रहकर परिवार की देखभाल करता है।