उत्तराखंड में रणजी ट्रॉफी की भागीदारी पर बना संकट, BCCI और सीओए आए आमने-सामने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड की रणजी ट्राफी में भागीदारी को लेकर बीसीसीआई और प्रशासकों की समिति (सीओए) के चेयरमैन विनोद राय आमने-सामने हो गए हैं। बीसीसीआई की विशेष आम सभा (एसजीएम) ने शुक्रवार को उत्तराखंड की रणजी ट्राफी में भागीदारी को मंजूरी नहीं दी।
वहीं विनोद राय ने बोर्ड के इस फैसले को खारिज करते हुए कहा है कि उत्तराखंड इस सत्र में रणजी ट्राफी खेलेगा। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले को देखने के लिए कहा है। इसके बाद ही उन्होंने राज्य में सहमति कमेटी का गठन एक साल के लिए किया है।
बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना की अगुवाई में हुई एसजीएम में क्रिकेटरों के संशोधित वेतन सहित बिहार, उत्तर पूर्वी राज्यों और उत्तराखंड के रणजी ट्राफी में खेलने का मामला रखा गया।
एसजीएम ने सर्वसम्मति से बिहार और उत्तर पूर्वी राज्यों को रणजी ट्राफी में खेलने की मंजूरी प्रदान कर दी, लेकिन उत्तराखंड को उसने मंजूरी देने से इंकार कर दिया। बोर्ड के एक पदाधिकारी का कहना है कि उत्तराखंड को रणजी में खेलने की इजाजत कैसे दी जा सकती है?
वहां कोई एक संघ काम नहीं कर रहा है। संघों केे बीच आपस में कोई समन्वय नहीं बना है। ऐसे में उत्तराखंड को मंजूरी देना जायज नहीं होगा, लेकिन सीओए चेयरमैन विनोद राय इस फैसले से सहमत नहीं हैं।
खास बात यह है कि बोर्ड की कार्यकारिणी की ओर से लिए गए फैसले बिना सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के लागू नहीं होंगे। बोर्ड के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने भी इस बात की घोषणा की कि कार्यकारिणी के फैसले सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद ही लागू होंगे। ऐसे में एसजीएम में लिए गए सभी फैसले सुुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएंगे।