फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Basmati area in capital Dehradun reduced by 252 hectares in four years due to urbanization

Dehradun: शहरीकरण से चार साल में 252 हेक्टेयर घटा राजधानी में बासमती का क्षेत्र, अब संरक्षण का बन रहा प्लान

Sat, 20 Jan 2024 05:34 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 20 Jan 2024 05:34 PM IST
सार

वर्ष 2018 में 680 किसान 410.18 हेक्टेयर भूमि में देहरादून में बासमती धान की खेती होती थी। वहीं, वर्ष 2022 में यह 157.83 हेक्टेयर पर आ गया है।
 

विज्ञापन
Basmati area in capital Dehradun reduced by 252 hectares in four years due to urbanization
बासमती की फसल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में शहरीकरण के चलते चार साल में दून बासमती चावल का क्षेत्रफल 252 हेक्टेयर घट गया है। देहरादून बासमती चावल के संरक्षण और संवर्धन के लिए उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड आगे आया है। बोर्ड के सहयोग से उत्तरा रिसोर्स डेवलपमेंट संस्था ने बासमती चावल टाइप-3 के शोध कार्य किया, जिसमें बासमती चावल का क्षेत्रफल तेजी से घटने पर चिंता जताई।

विज्ञापन

शुक्रवार को जलागम निदेशालय में उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की ओर से देहरादून बासमती धान के संरक्षण और संवर्धन पर कार्यशाला के शुभारंभ पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून बासमती धान का क्षेत्रफल घटने पर चिंता जताई। कहा, सबसे पहले बासमती से संबंधित कृषि भूमि का संरक्षण करने की आवश्यकता है।

विज्ञापन

बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर जोर
कहा, बासमती की खेती के लिए किसानों को सिंचाई सुविधा के साथ मार्केटिंग की व्यवस्था का ध्यान देना होगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। कार्यशाला में बताया कि वर्ष 2018 में 680 किसान 410.18 हेक्टेयर भूमि में देहरादून में बासमती धान की खेती होती थी। वहीं, वर्ष 2022 में यह 157.83 हेक्टेयर पर आ गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Uttarakhand:  हाई रिस्क जोन में जोशीमठ का 35 % हिस्सा, नगरवासियों ने बाहर बसने से किया साफ इनकार

उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. धनंजय मोहन ने कहा, वैज्ञानिकों, किसानों और व्यापारियों के देहरादून की बासमती धान के संरक्षण के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि पंतनगर के प्रो. आईडी पांडे ने कहा, बासमती धान के संरक्षण पर विवि लगातार काम कर रहा है। बासमती की नई प्रजाति पंत-एक और पंत-दो विकसित की है।

इस मौके पर बोर्ड के सदस्य आरके मिश्र, खंड विकास अधिकारी सहसपुर सोनम गुप्ता, रायपुर की अर्पणा बहुगुणा, जलागम प्रबंधन परियोजना की निदेशक नीना ग्रेवाल समेत अन्य अधिकारी व किसान मौजूद थे।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed