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स्वॉर्ड ऑफ ऑनर के लिए नहीं सेना के लिए धड़कता है इनका दिल

Sun, 12 Jun 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 12 Jun 2016 02:19 AM IST
सार

  • - अल्मोड़ा के राजेंद्र सिंह बिष्ट रहे कोर्स के सर्वश्रेष्ठ कैडेट
  • - केंद्रीय विद्यालय रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से की पढ़ाई
  • - ओवर आल मेरिट के ब्रांच पदक विजेता भी हैं राजेंद्र 

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interview of ima sword of honour rajendra singh bisht.
राजेंद्र सिंह बिष्ट - फोटो : अमरउजाला

विस्तार

भारतीय सैन्य अकादमी के 138 वें नियमित कोर्स के सर्वश्रेष्ठ कैडेट के तौर पर राजेंद्र सिंह बिष्ट को स्वार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड के अल्मोड़ा कांडली के रहने वाले बिष्ट मानते हैं कि कैडेट में स्वार्ड हासिल करना नहीं बल्कि बेहतर सैन्य अफसर बनने का जनून होना चाहिए।

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ओवर ऑल मेरिट लिस्ट के कांस्य पदक विजेता राजेंद्र ने कहा कि कोई भी कैडेट स्वॉर्ड हासिल कर सकता है और अकादमी में सभी कैडेट्स का प्रदर्शन बेहतरीन होता है। राजेंद्र का दिल सेना के लिए ही धड़कता है। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से पासआउट राजेंद्र के पिता सेना में सिविल स्टाफ पर तैनात हैं और इन दिनों रानीखेत कुमाऊं रेजीमेंट में पोस्टेड हैं।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह केंद्रीय विद्यालय और सैनिक स्कूल में पढ़े हैं। स्कूल के दौरान ही राजेंद्र सेना में जाने के लिए मन बना चुका था। पिता सेना में भले अन्य रैंक में थे, लेकिन उनकी प्रेरणा वही बने। राजेंद्र ने बताया कि सेना के प्रति लगाव उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

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'बेहतर सैनिक बनने के लिए मेहनत की, ऑनर के लिए नहीं'

interview of ima sword of honour rajendra singh bisht.
परिजनों के साथ स्वॉर्ड ऑफ ऑनर विजेता राजेंद्र सिंह बिष्ट - फोटो : अमरउजाला

स्कूल के बाद हर छात्र की तरह उनके पास किसी भी फील्ड में जाने के विकल्प थे, लेकिन वह सिर्फ सेना में जाना चाहते थे। एनडीए ज्वाइन करने से लेकर अब आईएमए पासआउट होने तक उन्होंने बेहतर सैनिक बनने के लिए जमकर मेहनत की, लेकिन प्रयास कभी स्वार्ड ऑफ ऑनर पाने के लिए नहीं किए।

उनका कहना है कि अगर लक्ष्य निर्धारित हो तो निरंतर प्रयास से सफलता मिलना तय है। पिता गोपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके बच्चों की प्राइमरी स्कूलिंग बरेली में मिली जहां से उनको मजबूत आधार मिला। उनका एक बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा जनपद के कांडली के पचीसी में उनका कफाड़ी गांव है। यह उनके परिवार के लिए गर्व की बात है कि बेटा अपने कोर्स में सर्वश्रेष्ठ रहा। यह उसको भविष्य में बेहतर सैनिक बनने के लिए एक प्रोत्साहन की तरह है।

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