उत्तराखंड: बैंकों की हड़ताल से प्रदेश में 2000 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
- ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने किया है आह्वान
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राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल उत्तराखंड के बैंकों की हड़ताल से प्रदेश में करीब 2000 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। हड़ताल में प्रदेशभर से 22 बैंकों की 1500 बैंक शाखाओं के 3300 कर्मचारी शामिल रहे। एसबीआई और प्राइवेट बैंकों के कर्मचारी इस हड़ताल का हिस्सा नहीं थे। हड़ताल की वजह से लोग परेशान नजर आए।
बैंकों के मर्जर सहित कई मुद्दों को लेकर आज बैंकों में हड़ताल थी। उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन के संयोजन में सभी बैंकों के कर्मचारी मंगलवार को एश्लेहॉल स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यालय पर एकत्र हुए। यहां ट्रेड यूनियनों के समर्थन के साथ उन्होंने जमकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन के संयोजक जगमोहन मेंदीरत्ता ने कहा कि यह हड़ताल सरकार की आर्थिक नीतियों और कर्मचारी विरोधी नतियों के लिए की जा रही है। सरकार जितनी तेजी से बैंकों का आपस में विलय कर रही है, उससे न केवल कर्मचारी बल्कि अधिकारियों की नौकरी पर भी संकट आ खड़ा हुआ है।
राष्ट्रपति को भी ज्ञापन भेजा
कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र की नीतियों पर गौर करें तो आने वाले समय में कई और बैंकों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसमें पीएनबी में ओरिएंटल बैंक, यूनाइटेड बैंक, केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक में कारपोरेशन व आंध्रा बैंक और इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय शामिल है।
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि पहले जो बैंक मर्ज किए गए थे, उनकी कार्यप्रणाली अभी तक सुधर नहीं पाई है। सरकार की इस तरह की नीतियों से एक ओर जहां बैंकिंग प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर बैंक कर्मचारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान जगमोहन मेंदीरत्ता, अनिल जैन, एसएस रजवार, नवीन कुमार, आरके गैरोला, इंदर सिंह, मुरारी लाल, एलएम बडोनी, बीके ओझा आदि मौजूद रहे। उधर, उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति ने सोमवार को जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।