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बादल देख कांप उठते हैं बांदल घाटी के बाशिंदे

Sat, 07 Feb 2015 07:27 PM IST
रेनू सकलानी/अमर उजाला, देहरादून
रेनू सकलानी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 07 Feb 2015 07:27 PM IST
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bandal valley condition after flood.

आसमान पर छाए बादल भले ही दूसरे किसानों के चेहरों पर अच्छी फसल की उम्मीद की खुशी जगाते हैं, लेकिन बांदल घाटी के किसानों की रूह इन्हें देखते ही कांप उठती है। छह माह पूर्व आसमान से बरसी आफत ने घाटी के दर्जनों घर तबाह कर दिए थे। खेत-खलिहान बर्बाद और क्षेत्र को जोड़ने वाले रास्ते, पुल भी नेस्तनाबूद हो गए थे।

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तब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो माह के भीतर व्यवस्था सुचारु करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, यहां अब भी रास्ते मलबे के ढेर में तलाशने पड़ रहे हैं। पानी के लिए महिलाएं, बच्चे एक से डेढ़ किलोमीटर तक दौड़ लगा रहे हैं। कुल मिलाकर 14-15 अगस्त की रात बरसी विपदा ने क्षेत्र के ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी है।
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सरकार और अधिकारियों की बेसुधी से टूट चुके ये ग्रामीण अब हर रात सोने से पहले भगवान से यही दुआ करते हैं कि उस रात की तरह फिर कभी आसमान न घिरे...।

जो किया, उसमें भी लापरवाही

bandal valley condition after flood.

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कुछ जगह काम तो शुरू हुआ, लेकिन सरकारी अधिकारियों और विभागों की लापरवाही यहां साफ नजर आती है। पेयजल लाइन बिछाने के लिए कई जगह खुदाई की, लेकिन काम नहीं किया गया। बिजली के खंभे ऐसी जगह लगा दिए गए हैं, जहां अगली बरसात में उनका गिरना तय है।

समिति बनी, लेकिन राहत नहीं
बांदल घाटी में आपदाग्रस्त कुछ गांव टिहरी में, जबकि कुछ देहरादून जिले में आते हैं। ऐसे में राहत कार्यों में दोनों जिला प्रशासन के बीच समन्वय बनाने के लिए विशेष समिति बनाई गई, जिसके अध्यक्ष रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ हैं। विधायक ने भी ग्रामीणों की समस्याओं के निवारण के लिए मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा था, लेकिन यह पत्र शायद शासन के गलियारों में कहीं अटक गया।

इन गांवों में है बुरा हाल

bandal valley condition after flood.
सरखेत, सीतापुर, ताछीला, घंतूसेरा, सिल्ला सेरा गांवों में अभी बदहाली की तस्वीर चारों ओर द‌िखती है।

ये काम अधर में
-संबंधित गांवों में अब तक नहीं बिछी है पेयजल लाइन
-सीतापुर और सरखेत को जोड़ने वाला पुल नहीं बना
-आपदा में तबाह हुए कई संपर्क मार्ग नहीं बन सके
-सड़कों पर अब भी कई जगह लगे हैं मलबे के ढेर
-बाढ़ सुरक्षा, पुश्ते निर्माण का काम शुरू तक नहीं हुआ

बोलीं प्रधान
आपदा के बाद मुख्यमंत्री ने गांव में जल्द सुविधाएं देने का निर्देश अधिकारियों को दिया था। लेकिन संबंधित विभागों की सुस्ती से क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं।
-नमनी देवी, प्रधान, सीतापुर

अधिकारी बिलकुल ध्यान नहीं दे रहे। ग्रामीण अपने स्तर पर ही कुछ काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी मदद नहीं मिली तो बड़ी दिक्कतें दूर होना मुश्किल है।
-आरती पंवार, प्रधान, सरखेत
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