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उत्तराखंडः पांच जल विद्युत परियोजनाएं होगी बंद!
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 Feb 2015 01:59 PM IST
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उत्तराखंड की पांच और जल विद्युत परियोजनाओं पर संकट है। राष्ट्रीय पार्क एवं वन्य जीव अभ्यारण्य के क्षेत्र में आ रही इन परियोजनाओं पर ईको सेंसिटिव जोन का डंडा चल सकता है।
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चल सकता है ईको सेंसिटिव जोन का डंडा
प्रदेश के पांच राष्ट्रीय राष्ट्रीय पार्क एवं वन्य जीव अभ्यारण्यों के चारों ओर दस किलोमीटर के दायरे में ईको सेंसिटिव जोन प्रस्तावित है। चार फरवरी को होनी वाली बैठक में सीमांकन और इन परियोजनाओं के भविष्य पर तस्वीर साफ होगी।
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2002 से लेकर 2016 तक के लिए घोषित नेशनल वाइल्ड लाइफ प्लान में ईको सेंसिटिव जोन के तहत बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। प्रदेश सरकार पर अब राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों के चारों ओर दस किलोमीटर के क्षेत्र में ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का दबाव है।
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चार फरवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वन विभाग की इस पर बैठक होगी और इस बैठक में इन जल विद्युत परियोजनाओं का भविष्य भी तय होगा। प्रदेश सरकार पर दबाव है कि राष्ट्रीय पार्कों के चारों ओर के दस किलोमीटर दायरे को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करे।
गोमुख से लेकर उत्तरकाशी तक संवेदनशील क्षेत्र घोषित किए जाने के विवाद से अभी तक सरकार उबर नहीं पाई है। ऐसे में पांच अभ्यारण्यों और पार्कों के चारों ओर संवेदनशील क्षेत्र घोषित करना सरकार को फिर नई परेशानी में डाल सकता है।
इसके साथ ही प्रदेश की पांच और महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं पर संकट के बादल हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश को करीब 800 मेगावाट बिजली मिलने का अनुमान है।
क्या है मामला
- 21 जनवरी 2002 को इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की बैठक में राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों के चारों ओर दस किलोमीटर के दायरे को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का फैसला हुआ।
- इस फैसले पर उत्तराखंड सहित कई राज्यों ने आपत्ति जताई थी। इनका कहना था कि बफर जोन में आबादी आ चुकी है और वहां बसावट हो चुकी हैं।
- 2002 से लेकर 2016 तक के वाइल्ड लाइफ प्लान में बोर्ड ने इसकी विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की।
- 17 मार्च 2005 की बोर्ड बैठक में तय हुआ कि उक्त संवेदनशील क्षेत्र की अधिसूचना प्रतिबंधित स्वभाव की बजाय विनियमित करने वाली होगी। 27 मई 2005 को सभी राज्यों को यह सूचना दे भी दी गई।
- सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि राज्यों को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
- केंद्रीयवन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 2010 में संवेदी क्षेत्रों से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्यों को जल्द से जल्द ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने होंगे।
- केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय यह स्पष्ट कर चुका है कि ईको सेंसिटिव जोन में बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होगा। दस किलोमीटर का दायरा एक तरह से शॉक आबजर्वर का काम करेगा और इसमें निजी उपयोग के लिए रेत, बजरी निकालना आदि प्रतिबंधित नहीं होगा। यातायात और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होगा पर सरकार को ये गतिविधियां नियमित करनी होंगी।
ये है परियोजनाएं
सेला उर्थिंग - 230 मेगावाट - अस्कोट वन्य जीव अभ्यारण
तालुका सांकरी - 140 मेगावाट - गोविंद पशु विहार
ऋषिगंगा-1 - 70 मेगावाट - नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क
ऋषिगंगा-2 - 35 मेगावाट - 35 मेगावाट
बावला नंद प्रयाग - 300 मेगावाट - केदारनाथ वन्य जीव अभ्यारण