{"_id":"6a74f79ed5b7db8a660dc6c4","slug":"bail-of-land-fraud-accused-cancelled-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1089-1036412-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: भूमि धोखाधड़ी के आरोपी की जमानत निरस्त, 10 अगस्त तक आत्मसमर्पण के निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: भूमि धोखाधड़ी के आरोपी की जमानत निरस्त, 10 अगस्त तक आत्मसमर्पण के निर्देश
Fri, 07 Aug 2026 02:37 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:37 AM IST
विज्ञापन
- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पलटा न्यायिक मजिस्ट्रेट का फैसला
टैग...अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। 65 लाख रुपये की भूमि धोखाधड़ी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने थाना सहसपुर के ग्राम फतेहपुर निवासी आरोपी रजनीश सैनी की जमानत निरस्त कर दी है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को पलटते हुए आरोपी को 10 अगस्त तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि उच्च न्यायालय ने पूर्व में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था और अधीनस्थ न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए थे।
सत्र अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट, विकासनगर ने दो मई को उच्च न्यायालय के आदेश के वास्तविक प्रभाव और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किए बिना ही आरोपी को जमानत दे दी थी। जमानत पर निर्णय लेते समय अपराध की गंभीरता, प्रकृति और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया। इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए जमानत आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
टैग...अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। 65 लाख रुपये की भूमि धोखाधड़ी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने थाना सहसपुर के ग्राम फतेहपुर निवासी आरोपी रजनीश सैनी की जमानत निरस्त कर दी है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को पलटते हुए आरोपी को 10 अगस्त तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि उच्च न्यायालय ने पूर्व में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था और अधीनस्थ न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
सत्र अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट, विकासनगर ने दो मई को उच्च न्यायालय के आदेश के वास्तविक प्रभाव और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किए बिना ही आरोपी को जमानत दे दी थी। जमानत पर निर्णय लेते समय अपराध की गंभीरता, प्रकृति और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया। इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए जमानत आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन