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Dehradun News: अवैध लीसा प्रकरण के दो आरोपियों को जमानत
Wed, 05 Aug 2026 11:49 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:49 PM IST
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त्यूणी क्षेत्र में एक पिकअप वाहन से 22 क्विंटल अवैध लीसा बरामद होने के मामले में जेल में बंद दो आरोपियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विकासनगर) नंदन सिंह की अदालत से जमानत मिल गई है। अदालत ने उत्तरकाशी जिले के थाना डुंडा के मंगांव निवासी कृष्णा और थाना नौगांव के ग्राम बसराली निवासी मुकेश को 30-30 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी ही धनराशि के दो-दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, वन विभाग की टीम ने 23 जुलाई की रात त्यूणी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक पिकअप वाहन से 22 क्विंटल अवैध लीसा और 14 खाली प्लास्टिक क्रैट बरामद किए थे। इस मामले में वन विभाग ने दोनों आरोपियों के साथ ही उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र (ग्राम पासा) निवासी राहुल के खिलाफ उत्तराखंड संशोधन वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी की थी। इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट चकराता आकाश कुमार की अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपों से इनकार करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए याचिका का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, मामले की प्रकृति और विचारणीय तथ्यों का अवलोकन करते हुए गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना दोनों आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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दरअसल, वन विभाग की टीम ने 23 जुलाई की रात त्यूणी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक पिकअप वाहन से 22 क्विंटल अवैध लीसा और 14 खाली प्लास्टिक क्रैट बरामद किए थे। इस मामले में वन विभाग ने दोनों आरोपियों के साथ ही उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र (ग्राम पासा) निवासी राहुल के खिलाफ उत्तराखंड संशोधन वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी की थी। इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट चकराता आकाश कुमार की अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपों से इनकार करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए याचिका का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, मामले की प्रकृति और विचारणीय तथ्यों का अवलोकन करते हुए गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना दोनों आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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