Badrinath Dham: 16 लाख 80 हजार पहुंची तीर्थयात्रियों की संख्या, 19 नवंबर को बंद होंगे धाम के कपाट
बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। यात्रियों की संख्या जिस तरह बनी हुई है उससे कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 18 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है।
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बदरीनाथ धाम की यात्रा भले ही इस साल के समापन की ओर बढ़ रही है लेकिन यात्रा की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है। धाम में रविवार शाम तक 16 लाख 80 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और बदरीनाथ के दर्शन किए। यात्रियों की संख्या जिस तरह बनी हुई है उससे कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 18 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है।
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बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। धाम में यात्रियों के आने का सिलसिला बना हुआ है। धाम में भले ही ठंड काफी बढ़ गई हो लेकिन यात्रियों के जोश में कोई कमी नहीं आई है।
बदरीनाथ के गर्भगृह की फोटो वायरल होने पर आक्रोश
भगवान बदरी विशाल की गर्भगृह स्थित विग्रह मूर्ति की फोटो लिए जाने व उसके सोशल मीडिया पर वायरल होने पर विभिन्न संगठनों ने रोष जताया है। कहा कि इससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था व विश्वास को ठेस पहुंची है। संगठनों ने इसके लिए बदरी केदार समिति की शिथिलता को जिम्मेदार ठहराया है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर बदरीनाथ मंदिर के गर्भ गृह की फोटो वायरल हो रही है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पूजा करते दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ मंदिर के धर्माधिकारी, वेदपाठी भी दिख रहे हैं। श्री बदरीश पंडा पंचायत अध्यक्ष प्रवीन ध्यानी व कोषाध्यक्ष अशोक टोडरिया ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गर्भ गृह की फोटो वायरल होने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था आहत हुई है। उनके अनुसार राजनीतिक लाभ के लिए गर्भ गृह की फोटो से तप में ध्यानस्थ भगवान बदरी विशाल की अवमानना हुई है।
श्री बदरीश युवा पुरोहित संगठन अध्यक्ष श्रीकांत बडोला व सचिव गौरव पंचभैया ने बताया कि वर्ष 1929 में गठित बदरी केदार मंदिर समिति द्वारा ही भगवान बदरीनाथ की विग्रह मूर्ति की फोटो लेना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया था। मगर इस बार स्वयं मंदिर समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस नियम को ताक पर रखा गया है।
प्रधानमंत्री की फोटो कवरेज कर रही टीम के सामने सभी मूक दर्शक बने रहे। चार धाम तीर्थपुरोहित हक हकूकधारी परिषद अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि हिंदुओं के आस्था केंद्रों के सरकारी नियंत्रण में होने से ऐसे परिणाम सामने आ रहे हैं जिसमें सत्ता शक्ति के बलबूते धार्मिक परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। श्री बदरीश पंडा पंचायत ने कहा कि मामले को अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित संगठन में ले जाया जाएगा।