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मलबा आने से लामबगड़ में फिर बंद हुआ बदरीनाथ हाईवे, 300 तीर्थयात्रियों को रास्ते में ही रोका

Thu, 13 Sep 2018 08:09 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, गोपेश्वर 
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, गोपेश्वर  Updated Thu, 13 Sep 2018 08:09 PM IST
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Badrinath highway closed after landslide 300 pilgrim stuck in Joshimat
badrinath highway

बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में बृहस्पतिवार को चट्टान से मलबा और बोल्डर आने से दोपहर डेढ़ बजे बंद हो गया जो देर शाम तक खोला नहीं सका। हाईवे बंद होने पर बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर जा रहे करीब 300 तीर्थयात्रियों को पुलिस प्रशासन की ओर से गोविंदघाट, पांडुकेश्वर और जोशीमठ में रोका गया है। 

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लामबगड़ में हाईवे बंद होने का सिलसिला नहीं थम रहा है। बृहस्पतिवार को मौसम सामान्य होने के बाद भी लामबगड़ में अपराह्न करीब डेढ़ बजे चट्टान से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर हाईवे पर आ गए और हाईवे बंद हो गया।

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यहां हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई। इसके बाद पुलिस ने तीर्थयात्रियों को जगह-जगह सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया। मेकाफेरी कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को मौसम सामान्य होने पर हाईवे सुचारु कर दिया जाएगा।

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नारायणबगड़ में आठ मोटर मार्ग बदहाल

Badrinath highway closed after landslide 300 pilgrim stuck in Joshimat

नारायणबगड़ में बारिश और भूस्खलन से विकासखंड के ग्रामीण मोटर मार्ग जोखिमभरे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कामचलाऊ हालात में खोले गए बदहाल मोटर मार्ग दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बदहाल आठ मोटर मार्ग सुधारने की मांग की।


बूंगा निवासी बलवंत सिंह, मींगगदेरा के सुरेंद्र धनेत्रा ने बताया ग्रामीण सड़कों पर भूस्खलन का मलबा अभी तक जमा है। यही नहीं धंसी हुई सड़कों और क्षतिग्रस्त पुश्तों से ग्रामीण यातायात दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है।

डुंग्री के हरेंद्र लाल ने बताया कि परखाल-डुंग्री मोटर मार्ग पर कई जगह पुश्ते धराशायी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इन सड़कों से प्रति दिन दो से चार हजार लोग आवागमन करते हैं। अवर अभियंता प्रसून नौटियाल ने बताया कि बंद मोटर मार्गों को वैकल्पिक तौर पर खोलना विभाग की प्राथमिकता है। बरसात खत्म होने के बाद सड़कों का सुधारीकरण शुरू कर दिया जाएगा।

वहीं, कोटद्वार-बीरोंखाल मार्ग पर सिमड़ी के पास पहाड़ी से मलबा आने और सड़क का पुश्ता ढहने से पिछले 14 दिन से बंद पड़ा है। लोग मीलों पैदल चलकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। करीब एक पखवाड़े से सड़क बाधित होने से क्षेत्र में रोजमर्रा की वस्तुओं की कमी पड़ने लगी है। बाजारों में खाद्यान्य की कमी हो गई है। लेकिन सरकारी मशीनरी और संबंधित महकमे ने पखवाड़ेभर बाद भी सड़क खोलने की जहमत नहीं उठाई है। जिससे क्षेत्र के 25 से अधिक गांवों में शासन और प्रशासन की उपेक्षा के प्रति आक्रोश पनप रहा है।       

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