चारधाम यात्रा: ग्लेशियर से सहमा है आस्था का दर
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चारधामों में प्रमुख धाम बदरीनाथ में इन दिनों विपदा की मार है। आस्था के दर पर पिछले साल आई आपदा का डर है और असर यहां के स्थानीय व्यापार और कारोबारियों पर साफ दिख रहा है।
फर्क बस इतना है कि इस बार जो श्रद्घालु पहुंच रहे हैं उन्हें हर साल की तरह लंबी कतारों की जगह बदरी विशाल के सहज और सीधे दर्शन मिल रहे हैं।
आमतौर पर मई-जून में प्रतिदिन 20-25 हजार लोग बदरीनाथ पहुंचते थे। इन दिनों हजार-डेढ़ हजार श्रद्घालु ही यहां पहुंच रहे हैं।
बदरीनाथ जाने वाले मार्ग पर पिछले साल आई आपदा के निशान अभी नदियों के किनारे पहाड़ियों पर साफ नजर आते हैं।
शांत और कलकल बह रही अलकनंदा, मंदाकनी, भागीरथी, धौलीगंगा और पिंडर आदि नदियों ने बदरीनाथ मार्ग पर जो तबाही मचाई थी उसकी भयावहता के साक्ष्य आज भी आपदा की गवाही दे रहे हैं।
तब की तबाही से निपटने की मुहिम में सैकड़ों मजदूर व मशीनें अभी भी जुटी हुई हैं। भुरभुरी मिट्टी के खतरनाक पहाड़ पहले की तहर राह में लगातार रोड़े अटका रहे हैं जिन्हें समेटने की कोशिशें भी जारी हैं।
सरकारी मेहनत पर पानी फेर रहे ग्लेशियर
ऋषिकेश से बदरीनाथ के बीच सर्वाधिक कठिन डगर जोशीमठ से शुरू होती है।
हनुमान चट्टी के आसपास की उबड़-खाबड़ खतरनाक सड़क के साथ गोविंदघाट के बाद से बदरीनाथ का मार्ग पर ऊपर से बहकर आए ग्लेशियर भी सरकारी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
इन ग्लेशियर के पास से गुजरने वाले पर्यटकों को भले ही सुखद अनुभूति हो लेकिन सड़क पर तेजी से बहकर आ रहा पानी हर वक्त खतरे को एहसास कराता है।
यहां सड़क निर्माण से जुड़ी टीमें मशीनों के साथ हमेशा यहां मुस्तैद रहती हैं। बदरीनाथ धाम पहुंचने पर पहले जहां बैरियर से ही वाहनों की लाइनें दिखने लगती थीं वहां सन्नाटा पसरा है।
बस अड्डे पर गिने-चुने वाहन और यात्री ही नजर आते हैं। निजी वाहनों के लिए बनी पॉर्किंग को लेकर भी इस बार कोई किचकिच नहीं दिख रही है। यात्रा के दिनों के लिए माणा मार्ग पर बने अतिरिक्त पार्किंग का इस्तेमाल इस साल बंद है।
जजमान के इंतजार में बैठे पुरोहित बेहद निराश
बीते सालों में इन दिनों मंदिर परिसर में प्रवेश के लंबी लाइनों से होकर गुजरना पड़ता था लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है।
यात्री सीधे तप्तकुंड और मंदिर में दर्शन के लिए जा सकते हैं। तप्तकुंड के पास जजमान के इंतजार में बैठे पंडा और पुरोहित बेहद निराश हैं।
पंडित भास्कर डिमरी का कहना है कि बदरीनाथ में हर साल की तरह सारी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं। श्रद्घालु आ रहे हैं लेकिन सीमित संख्या होने से स्थानीय लोगों को नुकसान हो रहा है।
यहां के दुकानदारों ने हर साल की तरह यात्रियों को ध्यान में रखकर माल भरा है। उनका कहना है कि लोगों का डर और सड़क मार्ग पूरी तरह से ठीक नहीं होने से संख्या घटी है।
मंदिर के सामने फोटोग्राफरों की टीम भी निराश है। दरअसल हर साल जोशीमठ और आसपास के गांवों के करीब दो दर्जन युवा यहां श्रद्घालुओं की फोटो खींचने का काम करते हैं।
फोटोग्राफर राजीव का कहना है कि सीजन में उनकी अच्छी कमाई हो जाती है लेकिन अब लोगों को पकड़-पकड़ कर फोटो करनी पड़ रही है और आपस में भी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।
बदरी विशाल पर चढ़ने वाली विशेष फूल-माला बेचने वालों के चेहरे भी मुरझाए हुए हैं।
यात्री रजिस्ट्रेशन औपचारिकता भर
चारधाम के लिए यात्रियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़े-बड़े दावे जरूर किए गए लेकिन यह औपचारिकता भर है।
जोशीमठ और गोविंदघाट से गुजरने वाले वाहनों के नम्बर और ड्राइवर का नाम तो दर्ज हो रहा है लेकिन यात्रियों को इसके लिए खुद ही मशक्कत करनी पड़ी है।
लिहाजा काफी संख्या में यात्री बिना रजिस्ट्रेशन के ही बदरीनाथ पहुंच रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए ऋषिकेश बस स्टेशन पर एक कार्यालय है।
जहां यात्री चाहें तो रजिस्ट्रेशन कराए और अथवा सीधे ही चले जाएं। रजिस्ट्रेशन को लेकर कहीं कोई पूछताछ या पड़ताल भी नहीं हो रही है।
धाम में बादलों की गड़गड़ाहट से सहमे श्रद्धालु
मौसम खराब होने के कारण रविवार को सुबह नौ बजे तक यात्रियों को केदारनाथ धाम नहीं जाने दिया गया।
मौसम खुलने पर सोनप्रयाग से 379 और गौरीकुंड से 337 यात्रियों को केदारनाथ के लिए रवाना किया गया। दोपहर तक धाम में धूप खिल गई।
मौसम साफ होने पर यात्रियों के साथ प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। रविवार को कुल 649 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दरबार में मत्था टेका। जबकि 490 यात्री शाम चार बजे तक केदारनाथ पहुंच गए थे।
सुबह केदारघाटी में मौसम अचानक बदल गया। आसमान में घने बादल घिर आए और अंधेरा छा गया। केदारधाम में भी अंधेरे जैसी स्थिति और बादलों की तेज गड़गड़ाहट से मंदिर में पूजा करने गए लोग डर गए।
बारिश होने पर मंदाकिनी नदी का जल स्तर बढ़ने की आशंका से कुछ लोग पुल पारकर हेलीपैड की ओर चले गए। इधर, खराब मौसम को देखते प्रशासन ने भी यात्रियों को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोक दिया।
हालांकि कुछ देर बाद ही मौसम साफ होने लगा। रविवार को केदारघाटी के अलावा अन्य इलाकों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई।
कुमाऊं में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। आंधी के साथ हुई मूसलाधार बारिश से सोबला में धौलीगंगा को डायवर्ट करने के लिए बनाई गई दीवार टूट गई। इससे वहां करीब साढ़े चार घंटे बाढ़ से हालात रहे।