शीतकाल के लिए बंद हुए बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, सीएम रावत रहे मौजूद
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भैया दूज के पावन पर्व पर मंगलवार को प्रात: 8.30 बजे विधि-विधान के साथ केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के छह माह के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन निवास स्थान ओंकारेशअवर मंदिर ऊखीमठ के लिए रवाना हो गई। आज डोली अपने पहले पड़ाव पर रामपुर पहुंचेगी।
कपाट बंद होने के अबसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, केंद्रीय मंत्री उमा भारती के साथ हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सहित डीएम और एसपी भी मौके पर मौजूद रहे।
केदारनाथ धाम में तड़के ही कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई। प्रात: 6.30 बजे से धाम में विशेष पूजा-अर्चना शुरू गुई। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग बाबा केदार की महाभिषेक पूजा के बाद प्रात: 7.30 बजे बाबा के स्वयंभू ज्योर्तिलिंग को समाधि रूप देने की प्रक्रिया शुरू की।
मुख्य पुजारी ने भस्म से ढंका ज्योर्लिंग
पूजा के बाद मंदिर के गर्भगृह में विशेष भस्म एवं समाधि पूजा के साथ ज्योर्लिंग को भस्म से ढक दिया गया। इसके बाद बाबा केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति को गर्भगृह से चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान कर मंदिर परिसर में लाया गया।
बीकेटीसी के पदाधिकारियों, केदारनाथ के रावल, मुख्य पुजारी ने सीएम रावत, केद्रीय मंत्री उमा भारती की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर दिए। इस दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की उत्सव डोली मंदिर की परिक्रमा कर अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए रवाना हो गई।
लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली होते हुए गौरीकुंड के रास्ते डोली पहले पड़ाव पर रामपुर पहुंचेगी। कपाट बंद होने को लेकर मंदिर को पांच कुंतल गेंदा व अन्य फूलों से सजाया गया है।