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Dehradun News: बच्चा नजर मिलाने से बचे, समय पर बोल न पाए तो डॉक्टर को दिखाएं

Tue, 02 Apr 2024 02:24 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2024 02:24 AM IST
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Avoid eye contact; if the child is unable to speak on time
बच्चा नजर मिलाने से बचे, समय पर बोल न पाए, नौ महीने की उम्र तक चेहरे पर खुशी, उदासी, गुस्सा, आश्चर्य जैसे भाव न दिखें और नाम का जवाब न दे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इन लक्षणों वाला बच्चा ऑटिज्म पीड़ित हो सकता है। समय पर इसका पता चलने पर उसकी बेहतर रिकवरी हो सकती है।
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दून अस्पताल की इमरजेंसी मेडिसिन के इंचार्ज डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि ऑटिज्म का जल्दी पता लग जाता है तो फंक्शनल रिकवरी बेहतर हो सकती है। जल्दी थेरेपी शुरू की जाए तो और बेहतर है। बच्चे के बोलना शुरू करने और उसके हाव-भाव पर ध्यान दें। बच्चे के लिए अलग से पढ़ाई की व्यवस्था करना और थेरेपी देना भी जरूरी है। ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. शमशेर द्विवेदी ने बताया कि कई कारण हैं जो ऑटिज्म की समस्या उत्पन्न करते और बढ़ाते हैं। इनमें जेनेटिक, सामाजिक और घर के वातावरण मुख्य कारण हैं। ऑटिज्म पीड़ित बच्चों की समस्या का पता एक से तीन साल में लग जाना चाहिए, लेकिन कोई बच्चा एक से तीन साल तक बोलने में दिलचस्पी नहीं लेता है तो मां-बाप को लगता है कि अभी छोटा है। इस वजह से वे ध्यान नहीं देते। डॉ. शमशेर द्विवेदी ने कहा, भारत में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों की संख्या का रिकॉर्ड दर्ज नहीं है क्योंकि ऑटिज्म पीड़ित बच्चे चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं।
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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है ऑटिज्म

निजी अस्पताल के डीएम न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति गौतम ने बताया कि ऑटिज्म एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसके इलाज के लिए मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक की मदद लेनी चाहिए। ऐसे बच्चे लोगों से मिलने से कतराते हैं। ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे अलग व्यवहार करते हैं जो सामान्य बच्चों में देखने को नहीं मिलता।





केस : 01 - दून के विभोर में सीखने की कला बेहतर



देहरादून के एक स्कूल में ऑटिज्म पीड़ित विभोर पांचवीं कक्षा में पढ़ते हैं। विभोर अपनी दिनचर्या के काम कर लेते हैं और उनमें सीखने की कला बेहतर है। हालांकि, उनमें सीखने की कला दूसरों से अलग है। विभोर कहते हैं कि मुझे वैसे ही स्वीकार करें जैसा मैं हूं तो मुझे बहुत खुशी होगी।






केस : 02 - सारेगामापा के कार्तिक को गायकी पसंद है

सारेगामापा सिंगिंग शो में ऑटिज्म पीड़ित कार्तिक अपनी गायकी की वजह से चर्चा में रह चुके हैं। कार्तिक की गायकी को बखूबी सराहा गया। ऑटिज्म पीड़ित कार्तिक अपनी बात कह नहीं पाते हैं और दूसरों की बात सुनने की क्षमता भी उनमें पूरी नहीं है। कार्तिक अपनी गायकी की वजह से सबके दिल में बस चुके हैं।





ये हैं लक्षण



- समय पर बोल नहीं पाना।

- नजरें न मिला पाना।



- दूसरों से न घुलना-मिलना।

- खिलौने या अन्य वस्तुओं को कतार में लगा देना और क्रम बदलने में परेशान हो जाना।



- शब्दों या वाक्यांशों को बार-बार दोहराना।

- हर बार एक ही खिलौने से खेलना।



- किसी काम को बार-बार करना।

- किसी एक काम में विशेष रुचि लेना।
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