हरीश रावत के जन्म के लिए माता-पिता ने किया था तप

अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Feb 2014 11:08 AM IST
autobiography of harish rawat
लंबे संघर्ष और बरसों इंतजार के बाद आखिरकार अल्मोड़ा के सुदूरवर्ती मोहनरी गांव के लाल को उत्तराखंड की बागडोर संभालने का सौभाग्य मिल ही गया। 2002 और 2012 में धोखा खा चुके हरीश रावत की रणनीति इस बार कामयाब रही।

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करीब एक माह पहले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की विदाई तय हो जाने के बाद से रावत और उनके समर्थकों ने जल्दबाजी नहीं दिखाई। रावत हाईकमान तक यह संदेश पहुंचाने में सफल रहे कि उनके आने से ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार हो सकती है।

पिता ने हाथ पर दीया जलाकर 24 घंटे की थी पूजा
हरीश रावत के पिता राजे सिंह को जब पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होंने मोहनरी गांव के दुर्गेश्वर (नवाड़) मंदिर में हाथ पर दीया जलाकर 24 घंटे पूजा की और उनकी पत्नी दानू देवी भी हाथों में फूल लेकर खड़ी रहीं।

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पूजा के एक वर्ष बाद हरीश रावत ने उनके घर में जन्म लिया। इसके बाद चंदन रावत और जगदीश रावत पैदा हुए।
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हाईस्कूल तक गांव में ही पढ़े-लिखे हरीश

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