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जब कार को धक्का लगाने लगे अटल बिहारी वाजपेयी

Thu, 25 Dec 2014 09:05 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 Dec 2014 09:05 PM IST
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atal bihari vajpayee in mussoorie

बात नवंबर 1957 की है। पीपल मंडी चौराहे पर एक फिएट कार हिचकोले लेकर बंद हो गई। कार चला रहे नरेंद्र स्वरूप मित्तल नीचे उतरे। साथ ही पिछला गेट खुला और अटल बिहारी वाजपेयी भी बाहर निकल आए। मित्तल के साथ अटल भी कार को धक्का देने लगे। ठीक उसी वक्त बगल से गुजर रहे तांगे पर लाउड स्पीकर से एलान हो रहा था-‘देश के महान नेता अटल बिहारी वाजपेयी दून में। जनसभा में जरूर आएं।’

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बुधवार को जब बातचीत का जिक्र छिड़ा तो ऐसी बेशुमार यादें बुजुर्ग व्यापारी नरेंद्र स्वरूप मित्तल के जेहन में कौंधने लगीं। लेकिन अटल से यह पहली मुलाकात का असर अमिट है। मित्तल उस वक्त डीएवी में बी. कॉम के छात्र थे और अटल परेड मैदान में जनसभा संबोधित करने आए थे। वह बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के बोलने के दिलचस्प अंदाज की वजह से दून के लोग उन्हें ‘प्रोफेसर’ कहा करते थे।
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मित्तल बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी हर साल वीकेंड मनाने मसूरी आते थे। ‘पहले वह घर आते, फिर मैं उन्हें छोड़ने मसूरी जाता। एक हफ्ते के बाद रेलवे स्टेशन छोड़ता।’ मसूरी प्रवास के दौरान वह कमीज, पायजामा पहनते। उन्होंने मना किया था कि ‘किसी को मत बताएं कि मैं मसूरी में हूं।’ एक दिन वह दवा की दुकान पर टेबलेट ले रहे थे। तभी दुकानवाले ने उन्हें गौर से देखा और बोला-‘आप अटल जी हैं।’ वह कुछ देर चुप रहे, फिर बोले ‘हां।’
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किसी को बताना मत

atal bihari vajpayee in mussoorie

वह अक्सर कहा करते-‘मैं आम आदमी की तरह रहना चाहता हूं।’ मित्तल ने बताया कि उन्होंने 30 बार अटल को दून से मसूरी पहुंचाया। 1985 में मसूरी से लौटते वक्त अटल ने ऋषिकेश जाने की इच्छा जताई। बोले-किसी को बताना मत, मेरी इच्छा है कि दुकान पर खड़े होकर चाट खाऊं।’

यादें
-जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो नरेंद्र स्वरूप मित्तल पूरे परिवार के साथ उन्हें बधाई देने पहुंचे। पहले वैयक्तिक सहायक, फिर भाजपा नेता प्रमोद महाजन ने कहा कि आज मुलाकात नहीं हो सकती। इस पर मित्तल ने अपना विजिटिंग कार्ड और बधाई संदेश पहुंचाने का अनुरोध किया। जैसे ही उन्होंने सुनाया और मित्तल परिवार को अंदर बुलाया। खुशी से सबकी आंखें नम हो गईं।

-अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून आखिरी बार 2007 में आए थे। तब उनके पैरों में दिक्कत थी। वह व्हील चेयर पर थे। पहले एक होटल में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शिरकत की। फिर परेड मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित किया।

-अटल बिहारी वाजपेयी मसूरी में कैम्टी फाल के पास हरियाणा भवन में ठहरते थे। यह जगह उन्हें बहुत पसंद थी। वह अक्सर पहाड़ी वादियों में ध्यान मग्न रहते। इसके बाद उन्होंने मनाली जाना शुरू कर दिया था।

-नरेंद्र स्वरूप मित्तल के एक परिचित मसूरी में अपने काम के सिलसिले में अटल से मिले। बाद में अटल ने मित्तल से पूछा तो उन्होंने कहा कि वह बहुत छोटे स्तर का काम लेकर आते हैं। आपके स्तर का हो तो मैं सिफारिश भी। इस पर अटल मुस्करा कर बोले कि चलो उसके काम के लिए मैं अपना स्तर छोटा कर लेता हूं। 

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