ऐसे मिलेगा अटल आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड, एक बार बनवाएंगे तो जिंदगीभर की टेंशन होगी खत्म
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में प्रदेश के हर परिवार को निशुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी। सरकारी और निजी अस्पताल में उपचार के लिए किसी को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को अमर उजाला कार्यालय, पटेलनगर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव नितेश झा, योजना के सीईओ युगल किशोर पंत और नोडल अफसर डॉ. सरोज नैथानी ने लोगों के सवालों का जवाब देते हुए यह आश्वासन दिया।
उन्होंने योजना की विस्तार से जानकारी देने के साथ ही इसके फायदे भी गिनाए। इस दौरान प्रदेशभर से हजारों लोगों ने अधिकारियों से सवाल पूछे और शंकाएं गिनाई। अधिकारियों ने शंकाओं का समाधान करते हुए आम लोगों से भी सहयोग की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यह योजना की शुरूआत है, अगर कोई दिक्कत आई तो अनुभवों के आधार पर इसमें करेक्शन होते रहेंगे। संवाद के दौरान पाठकों की ओर से पूछे गए प्रमुख सवाल और उनके जवाब...
आगे जानिए सारे सवालों के जवाब
गोल्डन कार्ड कैसे बनेगा? इसके लिए कहां जाना होगा?
-अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर और सरकारी अस्पताल में जाकर गोल्डन कार्ड बनवाया जा सकता है। इसके लिए आपका नाम पात्रता सूची में होना अनिवार्य है।
गोल्डन कार्ड बनाने पर कितना खर्च आएगा?
-कॉमन सर्विस सेंटर पर कार्ड बनाने के लिए 30 रुपये शुल्क देना होगा। कार्ड न होने पर फिलहाल उपचार के लिए सीधे अस्पताल जा सकते हैं। मुख्यमंत्री की ओर से जारी पत्र के साथ कोई भी मान्य आईडी होने पर उपचार की सुविधा मिलेगी।
क्या प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को अटल आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा?
-2012 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थी और 2012 में मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने वाले सभी परिवारों को योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा प्रदेश के जिन लोगों के नाम दर्ज नहीं है, उनको भी जांच के बाद योजना का लाभ मिल सकता है। इसमें एपीएल, बीपीएल जैसी कोई शर्त नहीं है।
अगर वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या लाभ नहीं मिलेगा?
-2012 की मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम शामिल था, अगर उनके पास उस समय का वोटर आईडी कार्ड है, तो उन्हें निश्चित लाभ मिलेगा। अगर उस समय नाम नहीं था और बाद में जोड़ा गया, तो उन्हें राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर की नकल जैसे दस्तावेज देने होंगे।
क्या इसके लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता होगी।
-नहीं। राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड के द्वारा लाभार्थी का नाम सूची में देखा जा सकता है। योजना के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं है।
सरकारी नौकरी और पेंशनरों को कैसे लाभ मिलेगा?
-राज्य सरकार की नौकरी करने वालों और पेंशनरों के लिए 26 जनवरी 2019 से अंशदायी योजना की शुरूआत की जा रही है। इसके तहत उन्हें असीमित उपचार की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके लिए उनसे पदक्रम के अनुसार बेहद मामूली अंशदान लिया जाएगा।
-योजना की वेबसाइट आयुष्मान उत्तराखंड डाट ओआरजी (ayushmanuttarakhand.org) पर पात्रता सूची देखी जा सकती है। यहां सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची भी है। इसका मोबाइल एप भी डाउनलोड कर इस्तेमाल कर सकते हैं। राशन कार्ड नंबर डालकर भी अपने परिवार का नाम देखा जा सकता है।
परिवार को मुख्यमंत्री की ओर से जारी पत्र कैसे मिलेगा?
-आशाओं के माध्यम से यह पत्र परिवारों को भेजे जाएंगे। आशाएं घर-घर जाकर यह पत्र देंगी। बाद में उनके गोल्डन कार्ड बनाकर दिए जाएंगे।
जिन लोगों के पास मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) का कार्ड है, उनका क्या होगा?
-वह सभी लोग जो एमएसबीवाई में शामिल रहे, इस योजना से आच्छादित हैं। अगर उन्हें अपना नाम देखना है तो वह वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। जैसे ही एमएसबीवाई कार्ड का नंबर डालेंगे, उनका नाम आ जाएगा।
जिन लोगों के नाम नाम पात्रता सूची में नहीं है, वह कैसे जोड़े जा सकते हैं?
-उत्तराखंड के निवासी जिनके पास 2012 का राशन कार्ड व वोटर आईडी कार्ड है और नाम पात्रता सूची में नहीं है तो उन्हें परिवार रजिस्टर के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। स्थानीय स्तर पर जांच के बाद वे वेबसाइट पर खुद पंजीकरण करा सकते हैं।
2011 के बाद जो लोग नौकरी या अन्य कारणों से राज्य में आए हैं, उनका क्या होगा?
-जो उत्तराखंड के निवासी हैं, उन्हें अटल आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा। सरकारी या निजी वर्ग के नौकरी पेशा लोगों के लिए ईएसआई, ईसीएचएस जैसी योजनाएं हैं। वैसे सरकारी अस्पतालों में तो उपचार मुफ्त उपलब्ध है, लेकिन उन्हें अटल आयुष्मान का लाभ नहीं मिलेगा।
योजना में निजी अस्पतालों पर निगरानी की क्या व्यवस्था रहेगी?
-इसके लिए विभागीय स्तर पर एक थर्ड पार्टी पैनल की व्यवस्था की जा रही है। यह पैनल दस्तावेजों की जांच के बाद बिल पेमेंट करेगी। साथ ही किसी भी अस्पताल के दस्तावेजों की जांच करेंगे। उसके अलावा फीडबैक की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके जरिये निजी अस्पतालों के उपचार पर पूरी नजर रखी जाएगी।
निजी अस्पताल स्कीम या बीमा के मामलों में अनावश्यक जांच कराते हैं व मरीज को ज्यादा दिन रोकते हैं?
-थर्ड पार्टी पैनल हर उपचार पर नजर रखेगी। अगर यह देखा जाता है कि अनावश्यक जांच की गई या मरीजों को अनावश्यक रोका गया, तो ऐसे मामलों में निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
योजना लागू होने के बाद क्या सरकारी अस्पतालों की बेहतरी के लिए काम नहीं होगा?
-ऐसा नहीं है। इस योजना में भी हमने सरकारी अस्पतालों के लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की है। सरकारी अस्पताल जो भी उपचार करेंगे, उसका 35 फीसदी उन्हें दिया जाएगा। इसके अलावा चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को 15 फीसदी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
किडनी ट्रांसप्लांट जैसे महंगे उपचार के मामले में क्या होगा?
-इस योजना में केवल पांच लाख रुपये तक का ही उपचार मिलेगा। किडनी ट्रांसप्लांट जैसे कुछ महंगे उपचार हैं, जिनका खर्च पांच लाख से ज्यादा है। ऐसे मामलों के लिए व्याधि निधि समेत सरकार की अन्य व्यवस्थाएं हैं।
महिलाओं के लिए योजना में क्या खास है?
-इसमें पूरे परिवार को एक यूनिट माना गया है। महिला और पुरुष के लिए कुछ अलग-अलग नहीं किया गया है। लेकिन, जिस तरह से हमारा सामाजिक ताना-बाना है, उस लिहाज से निश्चित तौर पर यह योजना महिलाओं के लिए वरदान साबित होगी।