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सांसद चुना, लेकिन नहीं चुन सकते प्रधान
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 Jun 2014 01:00 PM IST
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लोस चुनाव में सांसद चुन चुके हजारों लोगों से पंचायत चुनाव में अपने गांव का प्रधान चुनने का मौका छिन गया है।
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600 से अधिक वोटरों के नाम लिस्ट से गायब
जिला निर्वाचन कार्यालय की लापरवाही से देहरादून जिले के इन ग्रामीणों के नाम मतदाता सूची से गायब हो गए हैं। एक ही गांव के 600 से अधिक वोटरों के नाम लिस्ट में नहीं हैं।
यही नहीं, सूची में नाम, पते की भी गड़बड़ियां हैं। अब परेशान ग्रामीण ब्लाक से लेकर जिला निर्वाचन कार्यालय तक चक्कर काट रहे हैं। जिले में 460 ग्राम पंचायतें हैं।
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हर ग्राम पंचायत में औसत 25 मतदाताओं के नाम भी गायब मानें तो 11500 मतदाताओं के नाम गायब मतदाता सूची से गायब हैं।
सिर्फ 4406 ग्रामीणों के नाम शामिल
हर्रावाला ग्राम पंचायत की लोकसभा चुनाव की सूची में 5115 मतदाता हैं। इन मतदाताओं ने हाल ही में अपने मताधिकार का प्रयोग भी किया।
लेकिन इस सूची में शामिल 709 ग्रामीण पंचायत चुनाव में वोट नहीं दे पाएंगे। ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में सिर्फ 4406 ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।
नाम गायब करने की साजिश
विकासनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मेहूवाला के जिन ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में वोट दिया, उनमें से 138 का नाम पंचायत चुनाव की सूची में नहीं है।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने नाम गायब करने को साजिश करार दिया है।
रायपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत लाडपुर, ननूरखेड़ा, सुंदरवाला और रायपुर में लगभग डेढ़ हजार ग्रामीणों का नाम पंचायत मतदाता सूची में नहीं है।
लाडपुर के निवर्तमान ग्राम प्रधान कपिल बोरा बताते हैं कि इनमें से अधिकतर लोस चुनाव में वोट दे चुके हैं। अब उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया है।
ग्रामीण गांव छोड़कर शहरी क्षेत्रों में बस गए हैं। यही वजह है कि इन लोगों के नाम गांव की मतदाता सूची से गायब हैं। जो लोग छूट गए हैं उनके नाम पंचायतों की मतदाता सूची में अब शामिल नहीं हो सकते।
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- आरबी दुबे, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी