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आश्रम के प्रधान सेवक ने खुद को गोली से उड़ाया, चेहरे की हालत देख सहम गए लोग

Wed, 26 Jul 2017 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Wed, 26 Jul 2017 11:20 PM IST
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 ashram servant shot himself in almora

आश्रम में रहने वाले सेवक ने अचानक खुद को गोली मार ली। कनपटी पर गोली चलाई तो चेहरे के चीथड़े उड़ गए। वहीं मौके पर पहुंचे लोग हालत देखकर सहम गए।

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भनोली तहसील के अंतर्गत क्वैराली गांव में स्थित मिरतोला आश्रम के प्रधान सेवक 72 वर्षीय डेविड डेयरफोर्ड उर्फ देवाशीष पुत्र नेल्सन वेरिश ने बुधवार अपरान्ह आश्रम में कमरे के बाहर दो नाली बंदूक से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
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तहसीलदार ईश्वर सिंह भीमा के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आत्महत्या का कारण पता नहीं चल सका है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को दिन में 2:30 बजे प्रधान सेवक डेविड ने आश्रम परिसर के बाहर अपनी लाइसेंसी दो-नाली बंदूक से दाईं  कनपटी पर गोली मार ली।
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गोली लगने से उनके चेहरे के चीथड़े उड़ गए। आसपास काम कर रहे मजदूर और आश्रम की सेविका सानू गुप्ता फायर की आवाज सुनने के बाद मौके पर पहुंची तो डेविड  मृत पड़े थे। 

1965 में यहां आए थे भारत

 ashram servant shot himself in almora
सूचना मिलने पर भनोली के नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह भीमा, पटवारी दीपक वर्मा आदि आश्रम पहुंचे। राजस्व पुलिस को मौके से दो नाली बंदूक, एक कारतूस, एक खोखा और हथौड़ा बरामद हुआ है। समझा जा रहा है कि डेविड ने हथौड़े से बंदूक का ट्रिगर दबाया होगा। तहसीलदार ने बताया कि आत्महत्या का कारण ज्ञात नहीं हो सका है।

मिरतोला आश्रम उत्तर वृंदावन राधाकृष्ण मंदिर ट्रस्ट के अधीन और पुनवानौला से करीब एक किलोमीटर दूर पहाड़ी पर है। इसकी स्थापना पर्यावरणविद् माधव आशीष ने की और जल- पर्यावरण संरक्षण के लिए काम किया।

डॉ. कर्ण सिंह, कई नौकरशाह और राजनेता यहां माधव आशीष से मिलने आते थे। आस्ट्रेलिया निवासी डेविड भी माधव आशीष से मिलने 1965 में यहां आए और यहीं के होकर रह गए। 1970 में उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल कर ली थी।

​इन्हें देवाशीष के नाम लोग जानते थे। वर्तमान में वह आश्रम के प्रधान सेवक थे। वह सामाजिक कार्यों के साथ ही जरूरतमंद की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।
 
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