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निहत्थे रखवाले करते है 10 हजार पक्षियों की सुरक्षा

Mon, 29 Dec 2014 12:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Dec 2014 12:13 PM IST
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asan barrage water sports resort dehradun

करीब 444.40 हेक्टेयर में फैले देश के पहले देहरादून के संरक्षित क्षेत्र आसन झील की सुरक्षा वन विभाग के निहत्थे कर्मचारियों के जिम्मे है। 10 हजार से अधिक देसी-विदेशी पक्षियों के प्रवास वाली जगह की रखवाली छह कर्मचारी करते हैं। इनके पास सामान्य स्तर वाली तीन दूरबीनें हैं, जिनसे दूर तक देख पाना संभव नहीं होता है।

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विभाग के पास केवल एक बंदूक है, जिसे चलाने का अधिकार कर्मचारियों के पास नहीं है। झील के आसपास शिकारियों पर नजर रखने के लिए वॉच टावर तक नहीं है। ऐसे में झील के पक्षियों का शिकार रोक पाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
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सुखना झील में बर्ल्डफ्लू की खबर फैलने के बाद वन विभाग ने रेंज कर्मचारियों को तीन सर्च लाइट मुहैया कराई है। आसन झील में हर साल साइबेरिया और अन्य देशों से 250 से अधिक प्रजाति के 10 हजार से अधिक विदेशी पक्षी हर साल प्रवास के लिए आते हैं, जो करीब पांच माह तक यहां रहते हैं। आसन झील पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगी है।
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पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन कर्मचारियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। पूरी रेंज में महज एक बंदूक है, जिसे चलाने का अधिकार रेंजर के पास नहीं है। झील में गश्त करने के लिए विभाग के पास बोट तक नहीं है। इसके लिए जीएमवीएन की खस्ताहाल हाल वोटों पर निर्भर रहना पड़ता है। रात के समय में जीएमवीएन की बोट भी गश्त करने के लिए कारगर नहीं है।

मछलियों की आड़ में शिकार

asan barrage water sports resort dehradun

आसन संरक्षित क्षेत्र के साथ ही यमुना और डाकपत्थर बैराज में धड़ल्ले से मछलियों का शिकार जाल या फिर फंदी लगाकर होता है, ऐसे में विदेशी परिंदे भी हमेशा मछली का शिकार करने वालों की जद में रहते हैं।

झील की गश्त बढ़ाई
सुर्खाब के शिकार के बाद वन विभाग ने आसन झील और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। रविवार को रेंज अधिकारी जवाहर सिंह तोमर की अगुवाई में वन कर्मचारी ने गश्त की। रात को विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

आसन संरक्षित क्षेत्र जैसे अतिसंवेदनशील इलाके में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए आला अधिकारियों का सतर्क रहना जरूरी है। सुरक्षा के लिए फंड का इस्तेमाल करना चाहिए। मुखबिरों का नेटवर्क बढ़ाकर शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर पुलिस प्रशासन की मदद ली जा सकती है।
- आरबीएस रावत, प्रमुख वन संरक्षक (सेवानिवृत्त)

सुरक्षा के मद्देनजर डीएफओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पक्षियों पर निगरानी के भी निर्देश दिए गए हैं।
- डीवीएस खाती, प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव

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