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दस साल में इन्होंने नहीं ली एक भी छुट्टी, क्या है माजरा? पढ़ें

Mon, 20 Jul 2015 11:34 AM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 20 Jul 2015 11:34 AM IST
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aryan sat example for school bunkers.

अभी तक आपने कक्षा से बंक मारने वाले छात्रों और 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं होने पर परीक्षा से रोके जाने के बाद हंगामें की खबरें ही ज्यादा पढ़ी-सुनी होंगी। इन सब के बीच हरिद्वार का एक होनहार छात्रों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।

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डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर में कक्षा 11 में पढ़ने वाले आर्यन पंवार ने दस साल में स्कूल से एक भी छुट्टी नहीं ली है। कक्षा एक से लेकर अब तक आर्यन एक दिन भी स्कूल से गैरहाजिर नहीं रहा। फिर चाहे उसे 102 डिग्री बुखार रहा हो या फिर उसकी मौसी की शादी ही क्यों न हो।
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सतीकुंड कॉलोनी में रहने वाले रमन पंवार और बबीता पंवार का बेटा आर्यन जब नर्सरी में पहली बार स्कूल गया तो डर रहा था। वह खूब रोया भी। लेकिन डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल की तत्कालीन प्रधानाचार्य रेणुका अरोड़ा ने उसे अपनी गोद में बैठाकर समझाया कि स्कूल आने वाले बच्चे अच्छे होते हैं।
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जो स्कूल में आकर मेहनत करता है, उसे जीवन में सब कुछ मिल जाता है। उसके बाद तो आर्यन को स्कूल की लगन लग गई। कक्षा एक के बाद से उसने अभी तक एक दिन भी स्कूल नहीं छोड़ा है। आर्यन पढ़ने-लिखने में भी अच्छा है। हर कक्षा में उसे 80 फीसदी से ज्यादा नंबर मिलते हैं।

दिक्कतें भी कम नहीं आई सामने

aryan sat example for school bunkers.
आर्यन कुछ भी छोड़ सकता है लेकिन स्कूल जरुर जाता है। उसकी मां बबीता पंवार ने बताया कि एक बार उसे 102 डिग्री बुखार हो गया, इसके बावजूद दवा लेकर वह स्कूल गया।

एक बार आर्यन का एक्सीडेंट हो गया और पैरों में चोट आई। सबने मना किया लेकिन आर्यन घायल अवस्था में ही स्कूल पहुंचा। बबीता पंवार ने बताया कि अपनी मौसी की शादी में भी आर्यन शाम को पहुंचा और सुबह स्कूल के समय से पहले उसे हरिद्वार लेकर आना पड़ा।

यह मेरी कोई जिद या कॉम्पीटिशन नहीं है। बस हर रोज स्कूल जाना मेरी आदत बन चुका है। स्कूल खुले और मैं नहीं जाऊं, ऐसा अभी तक सोचा भी नहीं है। हर किसी को नियमित स्कूल जाना चाहिए। जो काम करो मन से करो। जो काम मिले उसे अपना अधिकतम नहीं बल्कि शत-प्रतिशत दो।
- आर्यन पंवार, 11 वीं का छात्र, डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल

आर्यन जैसे बच्चे स्कूल का गौरव हैं। इनकी लगन अन्य बच्चों को भी समयबद्धता के लिए प्रेरित करती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान इनके अभिभावकों का है। कई बार विपरित परिस्थिति होती है, उसके बावजूद बच्चे को स्कूल भेजना वास्तव में सराहनीय काम है। स्कूल की ओर से भी ऐसे बच्चों को समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है। आर्यन को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
- पीसी पुरोहित, प्रधानाचार्य डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर हरिद्वार
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