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PF जुर्माने का ब्याज न चुकाने पर कंपनी निदेशक गिरफ्तार, कंपनियों में मचा हड़कंप

Sat, 06 Jan 2018 12:29 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला , देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला , देहरादून Updated Sat, 06 Jan 2018 12:29 AM IST
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arresting for not submit provident fund claim in dehradun

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में कर्मचारियों के पीएफ अंशदान के जुर्माने का ब्याज जमा न कराने पर कंपनी निदेशक को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद में भुगतान करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

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लगातार दूसरी कार्रवाई से पीएफ चोरी करने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है। इससे पहले ईपीएफओ ने एक कंपनी को पीएफ अंशदान न देने पर सील कर दिया था। ईपीएफओ ने लंबे समय से कर्मचारियों का पीएफ चोरी कर रही कंपनियों की सूची तैयार की है।
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इन कंपनियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इस क्रम में दो दिन पहले सेलाकुई की मैसर्स सदानम पर्सनल प्रोडक्ट लिमिटेड को सील करने के बाद सेलाकुई की ही डेफो हिल्स लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई की गई है।
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कंपनी ने पीएफ जुर्माने की राशि (करीब 2.80 लाख रुपये) पर तो हाईकोर्ट से स्टे लिया हुआ है, लेकिन जुर्माने के ब्याज की राशि 1 लाख 39 हजार 259 रुपये है। ईपीएफओ की ओर से सितंबर से इस रकम को जमा कराने के लिए समन भेजे जा रहे थे।

इसके बावजूद कंपनी के अधिकारी यह रकम जमा कराने नहीं आए। रिकवरी के तहत ईपीएफओ ने आयकर अधिनियम 1961 के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बावजूद कोई पैसा जमा कराने नहीं आया।

ईपीएफओ के पास आयकर जैसी पावर

arresting for not submit provident fund claim in dehradun

आखिरकार ईपीएफओ की ओर से कंपनी के निदेशक प्रीतपाल सिंह चावला को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद निदेशक ने जुर्माने की रकम का ड्राफ्ट जमा कराया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई निरस्त की गई। ईपीएफओ की ओर से किसी कंपनी के खिलाफ पीएफ अंशदान में लापरवाही या गड़बड़ी करने पर यह लगातार दूसरी कार्रवाई है। मामले में डेफो हिल्स लैबोरेट्रीज कंपनी के निदेशक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन नहीं मिला। जब उनका पक्ष आएगा तो वह भी प्रकाशित किया जाएगा।

ईपीएफओ के पास आयकर जैसी पावर
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पास भी आयकर विभाग जैसी शक्तियां हैं। यहां पीएफ चोरी के मामले में आयकर अधिनियम के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाती है। ईपीएफओ के असिस्टेंट कमिश्नर आशीष कुमार के मुताबिक आईटी एक्ट के तहत ईपीएफओ किसी कंपनी में न केवल चल-अचल संपत्ति को नीलाम कर सकता है बल्कि कंपनी में रिसीवर भी तैनात कर सकता है। इसके अलावा कंपनी के परिसर को सील भी किया जा सकता है। ईपीएफओ के फैसले को सीधे हाईकोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है।

ईपीएफओ तकनीकी तौर पर सुदृढ़ होने के चलते सभी कंपनियों को ट्रेस कर रही है। जो कर्मचारियों का पीएफ अंशदान नहीं देगा, गड़बड़ी करेगा, उन पर कार्रवाई तय है। जल्द ही और कंपनियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
- मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1, देहरादून

 

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