Army Day: पाक-चीन को ढेर करने में सबसे आगे रहे उत्तराखंडी जाबांज, अनोखी है इनकी वीरता की मिसाल
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न केवल सेना में भर्ती बल्कि वतन के लिए मर मिटने के मामले में भी उत्तराखंड की बहादुरी की मिसाल दी जाती है। यहां से हर युद्ध में सैनिक या अफसर शहीद हुए हैं। अगर भारतीय सेना के चार युद्धों की तुलना आतंकवादियों के खिलाफ चले सैन्य ऑपरेशनों से की जाए तो शहीद होने वाले 1571 सैनिक यहां के हैं।
आजादी के कुछ दिन बाद 1948 में जम्मू-कश्मीर के कबायली हमले में राज्य के वीरों ने लोहा लिया था। 1962 में चीन से लड़े युद्ध और फिर पाकिस्तान से 1965 और 1971 में हुए दो युद्धों में राज्य के कई वीरों ने प्राण न्यौछावर किए।
श्रीलंका में सैन्य अभियान के बाद कारगिल युद्ध और अब आतंकवाद के खिलाफ अभियान में उत्तराखंड के शूरवीरों ने प्रदेश और देश का मान बढ़ाया। गढ़वाल और कुमाऊं की भौगोलिक परिस्थितियां जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर से मेल खाती हैं, ऐसे में यहां के वीर सैनिक सफलतापूर्वक इन क्षेत्रों में चल रहे सैन्य ऑपरेशनों का हिस्सा बनते हैं।
युद्ध और सैन्य अभियान
वर्ष शहीद
1948-61 83
1962 (भारत-चीन) 268
1965 (भारत-पाक) 226
1971 (भारत-पाक) 255
ऑपरेशन ब्लूस्टार (1984) 19
ऑपरेशन मेघदूत (सियाचिन 1984 से) 75
ऑपरेशन पवन (1987) 116
ऑपरेशन पराक्रम (जम्मू-कश्मीर 2001-02) 58
ऑपरेशन रक्षक (जम्मू-कश्मीर में 1991 से) 330
ऑपरेशन राइनो (असम में 1991 से) 23
ऑपरेशन आर्चिड (नागालैंड 1956 से) 11
ऑपरेशन विजय (कारगिल युद्ध 1999) 74
अन्य सैन्य ऑपरेशन 33