सेना में हथियार विवाद पर बोले आर्मी चीफ, ‘हथियार संग्रहालय में नहीं, हमारे जवानों के हाथों में’ हैं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हथियार म्यूजियम में रखने लायक हैं या नहीं, यह बेवजह की बात है। हमारे हथियार हमारे जवानों के हाथों में हैं। वे देश की रक्षा के लिए तत्पर हैं और भारतीय सेना हर मोर्चे पर लड़ने में सक्षम है।
हाल ही में सेना के पुराने हथियारों को लेकर पैदा हुए विवाद पर सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने यह बातें कहीं। रविवार को वॉर मेमोरियल छात्रावास का उद्घाटन करने देहरादून पहुंचे आर्मी चीफ ने कहा कि हथियारों की खरीद कोई एक दिन का काम नहीं है। इसमें दस-दस साल का समय लगता है।
सैन्य आधुनिकीकरण के लिए बजट की कमी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सेना प्रमुख बिपिन रावत ने साफ किया है कि भारतीय सेना के पास न सिर्फ पर्याप्त संसाधन हैं, बल्कि वह हर मोर्चे पर लड़ने में भी सक्षम है।
उन्होंने कहा कि हथियारों की खरीद की प्रक्रिया वैसी नहीं है जैसी किसी अन्य वस्तु की होती है। एक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरते हुए सैन्य साजो सामान खरीदे जाते हैं। इसमें दस-दस साल तक लग जाते हैं।
एएफएमसी-2 पर सरकार से चल रही बात
इसके अलावा सेना प्रमुख ने रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की उस रिपोर्ट से नाइत्तेफाक जाहिर किया, जिसमें कहा गया था कि सेना के 68 फीसदी हथियार संग्रहालय में रखने लायक हैं।
उन्होंने कहा कि क्या हथियार संग्रहालय में रख दिए गए? नहीं, हमारे जवान उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारी सेना हर मोर्चे पर मजबूती के साथ डटी है। सेना के पास कई ऐसे अचूक हथियार हैं, जिनका करीब ढाई दशक से इस्तेमाल किया जा रहा है।
सेना के पास कम दिनों का गोला-बारूद होने की बात को भी उन्होंने निरर्थक बताया। सेना में महिलाओं की ‘लड़ाकू’ भूमिका के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया चल रही है।
एएफएमसी-2 पर सरकार से चल रही बात
श्रीनगर राजकीय मेडिकल कॉलेज को आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) में बदलने के सवाल पर सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि सरकार के साथ इस संबंध में वार्ता की जा रही है। एएफएमसी के तमाम सारे मानक हैं, वे पूरे होंगे, तभी कुछ उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेषज्ञों की टीम श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का दौरा करेगी।