फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Aparajita 100 million smiles dehradun: webinar on migrant Women employment

अमर उजाला के मंच पर बोलीं अपराजिताएं, प्रवासी महिलाएं भी बन रहीं परिवार का सहारा 

Sun, 19 Jul 2020 07:27 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 19 Jul 2020 07:27 PM IST
सार

  • अमर उजाला अपराजिता के मंच से प्रवासियों के पुनर्वास में जुटीं महिलाओं ने साझा किए अनुभव और सुझाव
  • ‘प्रवासियों के पुनर्वास में महिलाओं की भूमिका’ पर आयोजित हुआ वेबिनार

विज्ञापन
Aparajita 100 million smiles dehradun: webinar on migrant Women employment
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संकट के बीच लौटे प्रवासी परिवारों के रोजीरोटी के चिंता के बीच एक उम्मीद की किरण फूटी है। घर लौटे ऐसे तमाम परिवार हैं जिनकी महिला सदस्यों ने ही कमाई के साधन तलाश लिए हैं। उनके लिए सहारा बनीं हैं उत्तराखंड की ही कुछ कर्मशील महिलाएं। इन महिलाओं ने शनिवार को अमर उजाला अपराजिता अभियान के तहत ‘प्रवासियों के पुनर्वास में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर आयोजित वेबिनार में अपने अनुभव और सुझाव भी साझा किए। उनका कहना है कि पुरुष सदस्य पर निर्भर रहने के बजाय प्रवासी महिलाओं को खुद आगे आना होगा। ये महिलाएं प्रवासी महिलाओं को काम देने के साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रहीं हैं। दूसरी ओर प्रवासी महिलाएं इन दिनों मास्क बनाकर तो कुछ घरेलू खाद्य पदार्थ जैसे आचार आदि बनाकर आजीविका का साधन जुटा रही हैं। 

विज्ञापन

ऋचा की फूड प्रोसेसिंग यूनिट में महिलाओं को मिला काम

20 से 25 महिलाएं जो हमारे साथ जुड़ी हैं। उन्हें उनकी योग्यता के हिसाब से काम दिया है। और कुछ को काम सिखाया भी जा रहा है। अपने प्रोडेक्ट की सप्लाई, पैकिंग आदि के लिए हमें भी लोगों की जरूरत होती है। ऐसे में बाहर लोगों को ढूंढने से बेहतर है अब हमें अपने ही गांव में लोग मिल रहे हैं। अभी महिलाएं आचार, जूस फूड प्रोसेसिंग से जुड़े हमारे काम में मदद करा रही है और रोजगार भी पा रही है।  भविष्य में यदि कोई प्रवासी वापस जाता भी है। तो उन्हें हम मार्केटिंग से जोड़ सकते हैं। हमारे प्रोडेक्ट बाहर पहुंचाने में हमें उनसे मदद मिलेगी।  प्रवासी महिलाओं के स्किल के जरिए हम बेहतर काम कराने की सोच रहे है।

विज्ञापन

- ऋचा डोभाल, फाउंडर, युवा हिमालय एग्रो फूड प्रोडेक्ट की फाउंडर, उत्तरकाशी

प्रवासी महिलाओं के तजुर्बे का किया जाए इस्तेमाल

बाहर काम करने वाली महिलाओं का तजुर्बा थोड़ा अलग होगा। ऐसा मेरा मानना है। पहाड़ की महिलाओं और प्रवासी महिलाओं दोनों के तजुर्बे का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं के जरिए लघु उद्योग शुरू किए जा सकते है। मेडिसन प्लांटिंग व मशरूम उत्पादन में खासकर बहुत अच्छा किया जा सकता है। लॉकडाउन के चलते सेलाकुंई में कई फैक्टरियां बंद हो गई थी। और यहां काम करने वाली महिलाओं की नौकरी चली गई। यह महिलाएं बहुत अच्छा सिलाई का काम करती हैं। तो हमने उन्हें मशीन उपलब्ध कराने की सोची। इसके अलावा लॉकडाउन में दूर- दराज के क्षेत्रों में महिलाओं को सैनिटरी पैड की बहुत दिक्कत हुई। इसलिए यहां जाकर हमने सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए। यह रोजगार का साधन भी बन सकता है। महिलाएं खुद ही इन्हें तैयार करने के काम कर सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

- आरती राणा, सामाजिक कार्यकर्ता, देहरादून 

मुख्यमंत्री स्वरोजगार जैसी योजनाओं की जानकारी जरूरी

प्रवासी महिलाओं को मैंने शुरूआत में कुछ ही मास्क बनाने का काम दिया, लेकिन जिस तेजी के साथ उन्होंने काम करना शुरू किया, अब काम और बेहतर होने लगा है। 50 महिलाएं इस वक्त मास्क बनाने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी अभी प्रवासियों को बहुत अधिक नहीं है। इसका फायदा महिलाएं उठाए। इसके लिए उन्हें जागरूक करना जरूरी है।

- सुरभि जयसवाल, बिल्डिंग ड्रीम्स फाउंडेशन, देहरादून

मास्क और आचार बना रही महिलाएं

अभी दस से बारह महिलाओं को आचार बनाने का काम दिया है। इसके साथ उन्हें मास्क बनाने के  लिए दिए हैं। बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन यह शुरूआत की गई है। हजारों मास्क अब तक बनाकर बांटे गए है, जिससे महिलाओं की आमदनी भी हो रही है। और वह अपने परिवार का कुछ खर्चा उठा सके। इसके अलावा उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इस समय किए गए हमारे छोटे-छोटे प्रयास आने वाले समय में फायदेमंद साबित होंगे। यहां के लोगों को यही काम मिल पाए तो उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा।


- विनीता खर्कवाल- एनसीसी प्रभारी, एमकेपी इंटर कालेज देहरादून

प्रवासियों से भेदभाव नहीं उन्हें हिम्मत दें

कोरोना वार्ड में बहुत सी प्रवासी महिलाएं भी थी। जिन्हें हिम्मत और हौसले की जरूरत थी। इस दौरान यह बहुत जरूरी था कि उनके साथ कोई भेदभाव न हो। प्रवासियों के साथ भेदभाव की घटनाएं हम हर दिन सुन रहे थे। ऐसे में मेरी जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ गई थी, कि वार्ड में किसी के साथ कोई भेदभाव न हो। कोरोना के चलते प्रवासियों को अपना कामकाज छोड़कर आना पड़ा है। वह पहले ही आर्थिक समस्या से जूझ रहे है। ऐसे में यह हम सबका दायित्व है कि उन्हें सहयोग दें। जो लौटे है वह हमारे अपने ही हैं।  
- रामेश्वरी नेगी (सहायक नर्सिंग अधीक्षिका, दून अस्पताल)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed