बच्चों की हिफाजत और अधिकारों के लिए जल्द बनेगा एंटी ट्रैफिकिंग कानून- कैलाश सत्यार्थी
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बच्चों की तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ देश में जल्द एंटी ट्रैफिकिंग कानून बनने जा रहा है। शुक्रवार को बाल मजदूरी और बाल अपराध के खिलाफ भारत यात्रा लेकर देहरादून पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में हाल में उनकी गृहमंत्री राजनाथ सिंह से वार्ता हुई है। सत्यार्थी का कहना है कि हर दिन 40 बच्चे देश में यौन शोषण और रोजाना 10 बच्चे ट्रैफिकिंग के शिकार हो रहे हैं। हर छह मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है।
इसे लेकर लोक जागरण के साथ ही नीतिगत तौर पर भी केंद्र सरकार से वार्ता की जा रही है। अपनी 35 दिन की भारत यात्रा के तहत वह यहां ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बहन-बेटी सुरक्षित रहेंगी, तभी देश सुरक्षित रहेगा। हमने सरकार से मांग की है कि हर जिले में विशेष अदालत बनाई जाए, जिसमें निश्चित समय के भीतर बाल यौन शोषण और बाल अपराध से संबंधित मामलों का निपटारा हो।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बाल यौन शोषण और बाल अपराध के 15 हजार मामले सामने आए, जिनमें केवल चार प्रतिशत को सजा हुई। छह प्रतिशत आरोपी छूट गए, जबकि 90 प्रतिशत मामले विचाराधीन हैं। वहीं, 2015 के 96 प्रतिशत मामले लंबित हैं।
भारत की छवि छात्र ही बदल सकते हैं
जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है। गरीबी के नाम पर बचपन की हत्या नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पहुंचने तक हमने 10 लाख लोगों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा था।
लेकिन, वर्तमान में ही यह आंकड़ा 11 लाख के पार हो चुका है। लोग सड़क पर उतरकर शपथ ले रहे हैं। सत्यार्थी ने कहा कि भारत की छवि छात्र ही बदल सकते हैं। लिहाजा देश के विद्यार्थियों को इतिहास रचने वाला बनना पड़ेगा। प्रवासी भारतीय युवा देश वापस लौट रहे हैं। बुराइयों को खत्म कर दें तो भारत फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है।
इससे पहले सुबह पांवटा साहिब होते हुए भारत यात्रा दून पहुंची। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से करीब एक किलोमीटर पहले सत्यार्थी ने विभिन्न स्कूलों के बच्चों के साथ पैदल मार्च किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं में जबर्दस्त उत्साह नजर आया। उन्होंने खड़े होकर कैलाश सत्यार्थी का स्वागत किया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि विवेकानंद, बुद्ध, महावीर और शंकराचार्य की भूमि में बचपन को बचाने की जरूरत है। सुशिक्षित संस्कार से ही सुरक्षित संसार बनता है। बच्चे ही देश के असली जीडीपी हैं। उन्होंने कैलाश सत्यार्थी को रुद्राक्ष का पौधा सौंपा।
कार्यक्रम में डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती, सीएम के प्रतिनिधि के रूप में कबीना मंत्री प्रकाश पंत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष प्रो. कमल घनशाला ने भी अपने विचार रखे।
‘सत्यार्थी क्लास’ में शामिल हुए करोड़ों बच्चे
अंत में वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने सत्यार्थी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सुमेधा सत्यार्थी, एडीजी कानून व्यवस्था, अशोक कुमार, हितेश शंकर, बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद भारत यात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना हो गई।
तीन माह तक नहीं की बात
सत्यार्थी ने बताया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं का एक ग्रुप बना हुआ है। ग्रुप में जुड़े लोग सभी से रोजाना संपर्क में रहते हैं। भारत यात्रा को लेकर जब मैंने उन्हें बताया कि उन्होंने कहा कि इससे कुछ नहीं होने वाला। लेकिन, आज लाखों लोग अभियान से जुड़ चुके हैं। भारत यात्रा के चलते मैंने ग्रुप के सदस्यों से तीन माह तक बात नहीं की।
हर साल भारतीय को मिले नोबेल शांति पुरस्कार
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि उनकी दिली इच्छा है कि देश को हर साल नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाए। उन्होंने कहा कि अब तक केवल 17 लोगों को ही नोबेल शांति पुरस्कार मिला है।
‘सत्यार्थी क्लास’ में शामिल हुए करोड़ों बच्चे
सत्यार्थी ने बताया कि जयपुर में उन्होंने एक ही दिन और समय पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ऑनलाइन क्लास ली, जिसमें चार करोड़ बच्चों ने हिस्सा लिया। जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। यह बताता है कि छात्र यौन शोषण और बाल अपराध को लेकर कितने जागरूक हैं।
11 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी यात्रा
भारत यात्रा की स्टेट को-ऑर्डिनेटर जया मिश्रा ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन की ओर से बीते 11 सितंबर को कन्याकुमारी से भारत यात्रा शुरू हुई थी। करीब 12 हजार किलोमीटर की यह यात्रा 22 राज्यों से होते हुए पूरी होनी है। 16 अक्तूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन पर यात्रा का समापन होगा। यात्रा का उद्देश्य बाल यौन शोषण और बच्चों की खरीद-फरोख्त की घटनाओं पर अंकुश लगाना है।