उत्तराखंडः दो क्विंटल दूध पी गए नेताजी!
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सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं को कौन खुश नहीं करना चाहता, संभवत: इसी मकसद से उत्तराखंड में एक मामला सामने आया है।
लालकुआं दुग्ध फैक्ट्री के अधिकारियों ने पैकेट बंद आंचल स्टैंडर्ड दूध की जगह खालिस दूध पिलाया। इसके लिए बुधवार को एक दुग्ध समिति से दो क्विंटल दूध मंगाया गया था, जो शाम तक साफ हो गया। यही नहीं दूध पिलाने के लिए 700 कुल्हड़ों की भी व्यवस्था की गई थी।
सर्किट हाउस में बुधवार को मंथन शिविर में कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए गरमागरम दूध की व्यवस्था करने को कहा गया था। बताते हैं कि लालकुआं दुग्ध फैक्ट्री ने आंचल का पैकेट बंद दूध भेजने के बजाय गौलापार खेड़ा की सुल्तान नगरी दुग्ध सहकारी समिति से सुबह दो क्विंटल दूध सीधे शिविर स्थल भेज दिया गया।
स्वाद बढ़ाने के लिए 700 कुल्हड़ भी भेजे
शिविर में इस दूध को उबाला गया और नेताओं को गरमागरम दूध पिलाने की व्यवस्था की गई। चर्चा रही कि अधिकारियों ने अपनी साख बचाने और नंबर बढ़ाने के लिए ऐसा इंतजाम किया था। नेताओं और कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए और दूध का स्वाद बढ़ाने के लिए 700 कुल्हड़ भी भेजे गए थे।
इसको लेकर डेयरी में ही यह सवाल उठा कि आखिर लालकुआं दुग्ध फैक्ट्री प्रशासन ने आंचल का पैकेट बंद दूध वहां क्यों नहीं भेजा। दुग्ध फैक्ट्री के सबसे अधिक बिकने वाले आंचल स्टैंडर्ड पैकेट बंद दूध में आ रही महक की शिकायतों का काफी समय से निस्तारण नहीं हो सका है।
बताया जाता है कि बुधवार को भी यही शिकायत आने की वजह से पैकेट बंद दूध शिविर में नहीं भेजा गया। वैसे तो फैक्ट्री में क्वालिटी मैनेजर की तैनाती भी है इसके बाद भी दूध में महक की शिकायत अब तक दूर नहीं हो पाई है।
अधिक मात्रा में अगर कोई भी दूध की डिमांड करता है तो उपलब्ध कराया जाता है। गौलापार दुग्ध समिति से सीधे कांग्रेस शिविर में दूध भेजने दुग्ध फैक्ट्री का पैकिंग का खर्चा बच गया। आंचल पैकेट में अगर महक आने की शिकायत आ रही है तो उसे दूर किया जाएगा।
- संजय किरौला, अध्यक्ष, लालकुआं दुग्ध संघ