संस्कृति के अनुरूप शिक्षा नहीं तो विकास किसी काम का नहीं : अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद अमित शाह ने कहा कि विश्वभर में भारत और भारतीयता का सम्मान व स्वीकृति तीव्र गति से बढ़ रही है। इसको गति प्रदान करने में पतंजलि योगपीठ का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
कितनी भी कठिनाईयां आएं स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ हैं। स्वदेशी शिक्षा का कार्य पतंजलि के सभी कार्यों में सबसे कठिन कार्य है लेकिन हम आश्वस्त हैं कि यह कार्य भी वे सहजता से करके दिखायेंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमारी शिक्षा प्रणाली हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकास किसी काम का नहीं है।
हमारी संस्कृति और शिक्षा के श्रेष्ठ गुणों को गौरव के साथ अपनाने का समय आ गया है। 10 हजार विद्यार्थियों के लिए आचार्यकुलम् तथा एक लाख विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की स्वामी रामदेव की संकल्पना कोई छोटा कार्य नहीं है। स्वामी रामदेव का लक्ष्य मात्र उन्हीं का लक्ष्य नहीं अपितु हम सबका लक्ष्य व कर्त्तव्य है।
शाह ने कहा कि विगत 25 वर्षों से स्वामी रामदेव निरन्तर योग और स्वदेशी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 हजार करोड़ का टर्नऑवर करने वाली कम्पनी का सम्पूर्ण लाभांश देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। जो अपने आप में राष्ट्रवाद का बड़ा उदाहरण है।
सीबीएसई संस्थान में आचार्यकुलम् ने प्रथम स्थान प्राप्त किया
स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्ष 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा मोजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस आचार्यकुलम् संस्थान की शुरूवात की थी वह संस्थान देश के पांच प्रामाणिक सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के सीबीएसई संस्थान में आचार्यकुलम् ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। योग, आयुर्वेद, स्वदेशी और वैदिक शिक्षा के कार्य में करोड़ों देशवासी हमारे साथ हैं। योग क्रान्ति के पश्चात् अब हम स्वदेशी शिक्षा क्रान्ति को गति दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि गुरुकुलम् इस क्रान्ति का एक कदम मात्र है। उन्होंने कहा कि अब हम आगे देशभर में लाखों विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था के लिए काम करने को संकल्पित हैं। कहा कि जब स्वामी श्रद्धानंद औश्र महामना मदन मोहन मालवीय ने सीमित संसाधनों में बड़े.बड़े विश्वविद्यालयों का संचालन कर दिया तो हमारे साथ तो करोड़ों हाथ हैं हम इस कार्य को निश्चित ही लक्ष्य तक पहुँचाकर रहेंगे।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शिक्षा में स्वदेशी को लेकर आज पूरे देश में नया उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम् स्वदेशी शिक्षा का बेहतर विकल्प है। आचार्यकुलम् में विद्यार्थियों के मानसिक विकास के साथ.साथ शारीरिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहाँ विद्यार्थियों को भाषा के स्तर पर हिन्दी, संस्कृत व अंग्रेेजी भाषाओं में पारंगत किया जा रहा है। उन्होंने आचार्यकुलम् के निदेशक, प्राचार्या और शिक्षकों को आभार जताते हुए कहा कि वे भविष्य के भारत का निर्माण कर रहे हैं।