अमर उजाला एक्सक्लुसिव : देवभूमि में अब नेचर टूरिज्म की शुरुआत
प्रकृति के साथ वन्यजीव, तितलियों और चिड़ियों का संसार निहारने का पैकेज टूर जारी किया गया है। उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और तितली ट्रस्ट ने इस पहल की शुरूआत की है।
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उत्तराखंड धार्मिक और साहसिक पर्यटन के लिए जाना जाता है। अब इसमें एक और शाखा प्रकृति पर्यटन (नेचर टूरिज्म) भी जुड़ गया है। उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और तितली ट्रस्ट ने इसकी शुरुआत की है। इससे जहां एक ओर पर्यटकों को उच्च हिमालय क्षेत्र को करीब से जानने का मौका मिलेगा, वहीं प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बोर्ड की ओर से इसके लिए टूर पैकेज जारी किया गया है।
बोर्ड और ट्रस्ट ने टूर पैकेज की शुरुआत की
उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता को लोग अब करीब से जान पाएंगे। अभी तक प्रदेश में लोग धार्मिक और साहसिक पर्यटन के लिहाज से ही ज्यादा आते हैं। अनेक लोग ऐसे भी हैं, जो कुछ दिन प्रकृति के बीच रहकर इसे निहारना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए बोर्ड और ट्रस्ट ने टूर पैकेज की शुरुआत की है। इसके तहत 19 से 25 जून के बीच के लिए पहला टूर पैकेज जारी किया गया है, जिसके तहत पर्यटकों को गंगोत्री वैली में छह रात और सात दिन रहने के लिए 22 हजार रुपये प्रति व्यक्ति खर्च करने होंगे। आने-जाने से लेकर रहने-खाने, लगेज, ट्रांसपोर्ट सहित तमाम सुविधाएं बोर्ड के पैकेज का हिस्सा होंगी। इस टूर पैकेज के लिए अभी तक दस से अधिक लोग पंजीकरण करा चुके हैं।
पर्यटकों को गांवों में ही होम स्टे कराया जाएगा
अलग तरह के इस प्रयोग में पर्यटकों को गांवों में ही होम स्टे कराया जाएगा। साथ ही भोजन भी स्थानीय कराया जाएगा। इस दौरान पर्यटक उच्च हिमालय की जैव विविधता को जानने के साथ ही वन्यजीवों, पक्षियों और तितलियों के संसार के बारे में जान सकेंगे। इस प्रयोग का उद्देश्य उत्तराखंड की जैव विविधता के बारे में लोगों को जानकारी देने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना भी है। इसमें गाइड से लेकर रहना-खाना, ट्रासपोर्ट इत्यादि सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही जुटाई जाएंगी। तितली ट्रस्ट के फाउंडर ट्रस्टी डॉ. संजय सोंधी ने बताया कि उत्तराखंड का 70 प्रतिशत से अधिक भू-भाग में वन हैं। यहां की जैव विविधता बेहद समृद्ध है। इस प्रयोग के जरिये प्रदेश में एक नए तरह के पर्यटन की शुरुआत करने की कोशिश की जा रही है।
प्रारंभिक तौर पर यह पायलट प्रोजेक्ट दो साल के लिए शुरू किया गया है। अभी तक इसके बेहतर रुझान मिले हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत जैव विविधता पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ उच्च हिमालय क्षेत्र में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। इसके हर हिस्से में स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है। जिससे उन्हें उनके घर पर ही रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है। जिसमें वह पर्यटकों को घुमाने के साथ ही जैव विविधता को कैसे संरक्षित रखा जाए, इसकी भी जानकारी देंगे।
- राजीव भरतरी, अध्यक्ष, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड