{"_id":"5e31113a8ebc3e7e583b1dee","slug":"amar-ujala-exclusive-many-states-new-map-will-make-after-100-years-by-survey-of-india","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सक्लूसिव: 100 साल बाद कई राज्यों के बनेंगे नए नक्शे, सर्वे ऑफ इंडिया ने शुरू किया सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक्सक्लूसिव: 100 साल बाद कई राज्यों के बनेंगे नए नक्शे, सर्वे ऑफ इंडिया ने शुरू किया सर्वे
Wed, 29 Jan 2020 10:39 AM IST
अलका त्यागी
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 29 Jan 2020 10:39 AM IST
सार
- 1920 के बाद सर्वे ऑफ इंडिया ने शुरू किया राज्यों का भौगोलिक सर्वे
- पहले चरण में हरियाणा, महाराष्ट्र व कर्नाटक का हो रहा सर्वे
- ड्रोन की ली जा रही मदद, दूसरे चरण में शामिल होंगे छह राज्य
विज्ञापन
ड्रोन से हो रहा राज्यों का सर्वे
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार ने कई राज्यों में नए सिरे से भौगोलिक सर्वे शुरू किया है। वर्ष 1920 के बाद किए जा रहे सर्वे की जिम्मेदारी सर्वे ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक सर्वे में अत्याधुनिक ड्रोन की मदद ली जा रही है।
विज्ञापन
देश के तमाम राज्य सरकारों द्वारा जो नक्शा राजस्व अभिलेखों समेत अन्य योजनाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है वह साल 1920 में तैयार किया गया था। एक शताब्दी बीत जाने के बाद अब नए भौगोलिक नक्शों की जरूरत महसूस हो रही है। इसके लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) की शुरुआत की है।
विज्ञापन
पहले चरण में हरियाणा, महाराष्ट्र व कर्नाटक में सर्वे भी शुरू हो गया है। उत्तराखंड, अंडमान निकोबार, गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में भी सर्वेक्षण कर भौगोलिक नक्शा तैयार किया जाएगा।
विज्ञापन
जीआईएस, ईटीएस से हो रहा सर्वे
सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों के मुताबिक लार्ज स्केल मैपिंग में जीआईएस के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन यानी ईटीएस जैसी तकनीक की मदद ली जा रही है। इस तकनीक के जरिए बेहद सूक्ष्म जानकारियां भौगोलिक सर्वे में जुटाई जा रही हैं।
स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं में कारगर
विशेषज्ञों के मुताबिक यह सर्वे स्मार्ट सिटी योजना के साथ ही पीडब्ल्यूडी, वन, सिंचाई, पंचायतीराज, पीडब्ल्यूडी समेत एक दर्जन विभागों के लिए बेहद लाभकारी होगा। नए मानचित्र तैयार होने से योजनाओं को तेजी से धरातल में उतारने में मदद मिलेगी।
स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं में कारगर
विशेषज्ञों के मुताबिक यह सर्वे स्मार्ट सिटी योजना के साथ ही पीडब्ल्यूडी, वन, सिंचाई, पंचायतीराज, पीडब्ल्यूडी समेत एक दर्जन विभागों के लिए बेहद लाभकारी होगा। नए मानचित्र तैयार होने से योजनाओं को तेजी से धरातल में उतारने में मदद मिलेगी।
1920 में भी तैयार हुए थे नक्शे
मौजूदा समय में जिन मानचित्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे 1920 में बनाए गए थे। तब से अब तक भौगोलिक स्थिति में काफी बदलाव आ चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य सरकाराें की ओर से इस संबंध में बहुत पहले पहल की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
डीआईएलआरएमपी के पहले चरण में हरियाणा, महाराष्ट्र कर्नाटक जैसे राज्यों का लार्ज स्केल मैपिंग के जरिये भौगोलिक सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। अगले चरण में उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, अंडमान और निकोबार जैसे राज्यों में सर्वे किया जाएगा। इन राज्यों के साथ जल्द ही एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। डीआईएलआरएमपी के तहत सभी राज्यों में सर्वे किया जाना जरूरी है।
-कर्नल पंकज मिश्रा, उपनिदेशक, सर्वे ऑफ इंडिया
डीआईएलआरएमपी के पहले चरण में हरियाणा, महाराष्ट्र कर्नाटक जैसे राज्यों का लार्ज स्केल मैपिंग के जरिये भौगोलिक सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। अगले चरण में उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, अंडमान और निकोबार जैसे राज्यों में सर्वे किया जाएगा। इन राज्यों के साथ जल्द ही एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। डीआईएलआरएमपी के तहत सभी राज्यों में सर्वे किया जाना जरूरी है।
-कर्नल पंकज मिश्रा, उपनिदेशक, सर्वे ऑफ इंडिया