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Dehradun News: चिकित्सक पर दो अस्पतालों की जिम्मेदारी, नहीं दूर हो रही पशुओं की बीमारी
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I- प्रभारी चिकित्साधिकारी तीन दिन साहिया और तीन दिन लाखामंडल अस्पताल में दे रहे सेवाएं
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I- दो पशु धन प्रसार केंद्र में भी नहीं हैं अधिकारीI
राजकीय पशु चिकित्सालय साहिया पाटन में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास साहिया के साथ लाखामंडल के राजकीय पशु चिकित्सालय का भी प्रभार है। वह तीन दिन साहिया और तीन दिन लाखामंडल अस्पताल में बैठते हैं। साहिया का अस्पताल अन्य तीन दिन फार्मास्टिट के भरोसे चलता है। पशु की हालत गंभीर होने पर उसको कालसी लाना पड़ता है। इससे पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वित्त वर्ष 2013-14 में साहिया पाटन में राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण किया गया था। अस्पताल में एक चिकित्सक और फार्मासिस्ट सहित चार कर्मचारी तैनात है। लेकिन, अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास साहिया पाटन और लाखामंडल पशु चिकित्सालय की दोहरी जिम्मेदारी हैं। साहिया पाटन और लाखामंडल के बीच की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। कभी इमरजेंसी कॉल आने पर अचानक साहिया और लाखामंडल क्षेत्र में पशुओं को देखने भी जाना पड़ता है।
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Iगांगरो और नगोऊ में नहीं हैं पशुधन प्रसार अधिकारीI
पशु चिकित्सालय से जुड़े चार पशु धन प्रसार केंद्र है। इनमें से गांगरो और नगोऊ केंद्र में पशु धन प्रसार अधिकारी का पद लंबे सम ये रिक्त पड़ा है। अब पशुओं के कृत्रिम गर्भधारण या प्राथमिक उपचार के लिए साहिया से ही कर्मचारियों को भेजना पड़ता है। इससे अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
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Iपशुओं को रखने के नहीं हैं इंतजामI
- अस्पताल में गंभीर पशु को भर्ती करने का इंतजाम नहीं है। पशुपालकों को आसपास के ग्रामीणों की छानियों में बीमार पशु रखने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
I- चिकित्सक तीन दिन ही अस्पताल में मिलते हैं। अगर पशु गंभीर बीमार होते हैं तो उसको कालसी लेकर जाना पड़ता है। बड़ी परेशानी होती है।
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Iभीम सिंह, दातनु
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Iतीन दिन अस्पताल फार्मासिस्ट भरोसे चलता है। पशुओं को बिना देखे दवा देकर भेज दिया जाता है। लाखामंडल में चिकित्सक की तैनाती कर साहिया के चिकित्सक को रिलीव करना चाहिए।
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Iनरेंद्र सिंह राय, उद्पाल्टा
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Iग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। आए दिन पशु बीमार पड़ते हैं। जब अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिलेंगे तो उपचार कौन करेगा। समस्या का समाधान होना चाहिए।
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Iसियाराम राठौर, पानुआ
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Iदो जगह का प्रभार है। तीन दिन साहिया और तीन दिन लाखामंडल में ड्यूटी देनी पड़ती है। दोनों अस्पतालों के बीच दूरी काफी अधिक है। दोनों जगह से इमरजेंसी कॉल भी आती हैं। बड़ी परेशानी होती है।
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Iडॉ. नरेंद्र लाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय पशु चिकित्सालय, साहिया पाटनI
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I- दो पशु धन प्रसार केंद्र में भी नहीं हैं अधिकारीI
राजकीय पशु चिकित्सालय साहिया पाटन में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास साहिया के साथ लाखामंडल के राजकीय पशु चिकित्सालय का भी प्रभार है। वह तीन दिन साहिया और तीन दिन लाखामंडल अस्पताल में बैठते हैं। साहिया का अस्पताल अन्य तीन दिन फार्मास्टिट के भरोसे चलता है। पशु की हालत गंभीर होने पर उसको कालसी लाना पड़ता है। इससे पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वित्त वर्ष 2013-14 में साहिया पाटन में राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण किया गया था। अस्पताल में एक चिकित्सक और फार्मासिस्ट सहित चार कर्मचारी तैनात है। लेकिन, अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास साहिया पाटन और लाखामंडल पशु चिकित्सालय की दोहरी जिम्मेदारी हैं। साहिया पाटन और लाखामंडल के बीच की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। कभी इमरजेंसी कॉल आने पर अचानक साहिया और लाखामंडल क्षेत्र में पशुओं को देखने भी जाना पड़ता है।
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Iगांगरो और नगोऊ में नहीं हैं पशुधन प्रसार अधिकारीI
पशु चिकित्सालय से जुड़े चार पशु धन प्रसार केंद्र है। इनमें से गांगरो और नगोऊ केंद्र में पशु धन प्रसार अधिकारी का पद लंबे सम ये रिक्त पड़ा है। अब पशुओं के कृत्रिम गर्भधारण या प्राथमिक उपचार के लिए साहिया से ही कर्मचारियों को भेजना पड़ता है। इससे अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
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Iपशुओं को रखने के नहीं हैं इंतजामI
- अस्पताल में गंभीर पशु को भर्ती करने का इंतजाम नहीं है। पशुपालकों को आसपास के ग्रामीणों की छानियों में बीमार पशु रखने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
I- चिकित्सक तीन दिन ही अस्पताल में मिलते हैं। अगर पशु गंभीर बीमार होते हैं तो उसको कालसी लेकर जाना पड़ता है। बड़ी परेशानी होती है।
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Iभीम सिंह, दातनु
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Iतीन दिन अस्पताल फार्मासिस्ट भरोसे चलता है। पशुओं को बिना देखे दवा देकर भेज दिया जाता है। लाखामंडल में चिकित्सक की तैनाती कर साहिया के चिकित्सक को रिलीव करना चाहिए।
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Iनरेंद्र सिंह राय, उद्पाल्टा
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Iग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। आए दिन पशु बीमार पड़ते हैं। जब अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिलेंगे तो उपचार कौन करेगा। समस्या का समाधान होना चाहिए।
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Iसियाराम राठौर, पानुआ
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Iदो जगह का प्रभार है। तीन दिन साहिया और तीन दिन लाखामंडल में ड्यूटी देनी पड़ती है। दोनों अस्पतालों के बीच दूरी काफी अधिक है। दोनों जगह से इमरजेंसी कॉल भी आती हैं। बड़ी परेशानी होती है।
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Iडॉ. नरेंद्र लाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय पशु चिकित्सालय, साहिया पाटनI