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बेटे के गम में पिता ने छोड़ दी दुनिया, 19 साल तक लड़ी मां

Sun, 10 May 2015 07:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 10 May 2015 07:33 PM IST
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alok father died four days after his death.

न्याय की आस में बैठी बूढ़ीं मां को जब पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके बेटे के हत्यारों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है तो आंखों में आंसू आ गए। रुंधे गले से आलोक चांदना की मां नीलम ने कहा कि अदालत से उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी। बेटे को न्याय मिलने से खुशी मिली है। बहुत मुश्किल से बेटे को न्याय मिला है।

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बताती हैं कि आलोक की मौत के चार दिन बाद ही उसके पिता की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। वकील उमेश अरोड़ा बताते हैं कि बेटे की मौत के गम में पिता ने भी दुनिया छोड़ दी थी।
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डीएवी कालेज के कैंपस में 19 साल पहले हुई छात्र नेता आलोक चांदना की हत्या में सुप्रीम कोर्ट ने भी सातों आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। आलोक की मां नीलम कहना है कि उन्हें खुशी है कि आरोपियों को अदालत ने सजा बरकरार रखी है।

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मुकदमा न लड़ने के लिए दी गईं धमकियां

alok father died four days after his death.

कहती हैं कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने बहुत कुछ सहा है। बताती हैं कि मुकदमा नहीं लड़ने के लिए उन्हें कई बार धमकाया गया। मारपीट की गई। उनके वकील उमेश अरोड़ा को धमकाया गया। मारपीट की गई। लेकिन न तो उन्होंने हिम्मत हारी, न ही उनके वकील ने।

मामले में मारपीट का एक मामला सुप्रीम में कोर्ट में चल रहा है। उमेश अरोड़ा ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें भी धमकाया था। मारपीट की थी, लेकिन उन्होंने केस लड़ना नहीं छोड़ा। वकील से मारपीट का मामला दून जिला अदालत में चल रहा है।

छोटे बेटे के साथ रह रही नीलम
आलोक चांदना के पिता प्रापर्टी डीलर का काम करते थे। आलोक की मौत को वह बर्दाश्त नहीं कर पाए थे। चार दिन बाद ही हार्टअटैक पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। पति के जाने के बाद से नीलम की गृहस्थी भंवर में फंस गई थी। किसी तरह छोटे बेटे आशीष को लिखाया-पढ़ाया और उसे अपनेे पैरों पर खड़ा किया। नीलम बताती हैं छोटे बेटे के साथ ही वह किसी तरह गुजर बसर कर रही हैं।

चंडीगढ़ ले जाते समय हुई थी आलोक की मौत

alok father died four days after his death.

आलोक चांदना डीएवी कॉलेज से छात्र संघ का चुनाव लड़ना चाहता था। दीपक कालड़ा ने उसे चुनाव नहीं लड़ने के लिए कहा था। आलोक ने दीपक की बात नहीं मानी इसी बात पर उनमें झगड़ा हो गया था। दोनों गुटों में बात धीरे-धीरे बढ़ गई।

इसके बाद आलोक और उसके साथियों पर चाकू और हॉकी से कई वार किए गए थे। इसमें आलोक गंभीर घायल हो गया था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

डीएवी कॉलेज के 1996-97 में अध्यक्ष रहे विजय प्रताप मल्लाह बताते हैं कि उस दिन कुछ छात्रों के बीच हल्का झगड़ा हुआ था। इस बीच आलोक वहां से भागने लगा था तो कुछ छात्र उसके पीछे भागे थे। उसे पीटा तो वह गिर गया। इस बीच उसकी रीढ़ की हड्ड़ी में चाकू लग गया था।

लोगों ने उसे कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया था लेकिन उसकी गंभीर हालत की वजह से चिकित्सकों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। चंडीगढ़ ले जाते वक्त रास्ते में आलोक की मौत हो गई थी।

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