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'उत्तराखंड विस अध्यक्ष ने किया राष्ट्रगान का अपमान', जानिए पूरा मामला

Sat, 23 Jul 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 23 Jul 2016 09:23 AM IST
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allegation of insults to national anthem in uttarkhand assembly.
गोविंद सिंह कुंजवाल - फोटो : अमरउजाला

उत्तराखंड में विधानसभा के दो दिवसीय सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद राष्ट्रगान न होने पर विपक्ष के तेवर गर्म हो गए। इसको लेकर विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष पर परंपरा का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए देश से माफी मांगने की मांग की है।

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नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि सरकार द्वारा किए गए इस असंवैधानिक कृत्य के प्रति स्वत: संज्ञान लेते हुए विधि सम्मत कार्रवाई करें।
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विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बृहस्पतिवार से शुरू हुआ था। शुक्रवार को इस सत्र का आखिरी दिन था। सत्र के समाप्त होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने यह कहा कि सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाता है। इसके बाद वह पीठ से उठकर चले गए। जबकि परंपरा यह रही है कि सत्र शुरू होने पर राष्ट्रगीत और सत्र की समाप्ति राष्ट्रगान होता है।

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राष्ट्रगान के अपमान का आरोप, स्पीकर ने दी सफाई

allegation of insults to national anthem in uttarkhand assembly.
गोविंद कुंजवाल - फोटो : file photo

दो दिवसीय सत्र बृहस्पतिवार को जब शुरू हुआ था तो राष्ट्रगीत हुआ था, लेकिन शुक्रवार को जब सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया तो राष्ट्रगान नहीं हुआ।

इसको लेकर विपक्ष ने सरकार व विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप लगाया है कि उन्होंने परंपरा का पालन नहीं करके राष्ट्रगान का अपमान किया है। विधानसभाध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि जब सत्रावसान होता है तब राष्ट्रगान होता है। सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है, इसलिए राष्ट्रगान नहीं कराया गया। 

क्या कहना है कि विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों का

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हरबंस कपूर - फोटो : फाइल फोटो

यह परंपरा रही है कि सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते वक्त भी राष्ट्रगान होता है। सत्र का समय निर्धारित नहीं है इसलिए राष्ट्रगान होना चाहिए था। विधानसभा की परंपरा तोड़ी गई है जो उचित नहीं है।
-प्रकाश पंत

सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद राष्ट्रगान होना चाहिए था। यह बहुत बड़ी भूल है। यह तो विधानसभा की नियमावली में है कि सत्र के शुरू होने पर राष्ट्रगीत व समाप्त होने या अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने पर राष्ट्रगान होगा। सत्र का एजेंडा पूरा हो गया है लिहाजा राष्ट्रगान होना चाहिए था।
-हरबंस कपूर
 
सत्र की समाप्ति पर राष्ट्रगान की व्यवस्था है। सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाते समय ऐसा जरूरी नहीं है। अभी सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है। ऐसे में किसी परंपरा का उल्लंघन नहीं हुआ है।
-यशपाल आर्य

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