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अल्पसंख्यकों को तोहफा, सबको वजीफा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 02 Nov 2013 10:45 AM IST
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उत्तराखंड में पंचायत और लोकसभा चुनाव से पहले सरकार अल्पसंख्यकों को रिझाने में जुट गई है। शुक्रवार को अल्पसंख्यकों के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
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अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए अंकों की बाध्यता खत्म कर दी। अब सभी उत्तीर्ण अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिल सकेगी। वहीं 75 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण होने वाली अल्पसंख्यक वर्ग की छात्राओं को 15 हजार रुपए देने की सरकार की योजना में भी अंक प्रतिशत घटा कर 60 फीसदी कर दी गई है।
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सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए भी चार करोड़ रुपए देगी। अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के लिए वार्षिक बजट भी सरकार ने बढ़ाते हुए तीन करोड़ रुपए कर दिया है। अभी तक यह राशि डेढ़ करोड़ रुपए ही थी।
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आय सीमा 80 हजार रुपए वार्षिक
स्वरोजगार के लिए आवेदकों की वार्षिक आय सीमा 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 80 हजार रुपए वार्षिक करने का भी सरकार ने फैसला लिया है। विश्व अल्पसंख्यक दिवस पर 21 दिसंबर को प्रदेश में अल्पसंख्यक सम्मेलन आयोजित करने का भी फैसला लिया गया है।
फैसलों पर चुनावी प्रभाव ज्यादा
शुक्रवार को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा लिए गए इन फैसलों पर चुनावी प्रभाव ज्यादा नजर आया। उन्होंने अधिकारियों से अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया। साथ ही जरूरत महसूस करने पर मानकों को शिथिल करने का प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि अल्संख्यक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग को शिक्षा और रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। अल्पसंख्यक वर्ग के सभी उत्तीर्ण छात्रों को छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए। पूर्व में छात्रवृत्ति के लिए 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होने की बाध्यता थी। इस बाध्यता को खत्म करने से करीब 1.60 लाख छात्रों को लाभ मिलेगा।