हरिद्वार: खतरे के निशान पर पहुंचा गंगा का जलस्तर, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
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तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। सोमवार को गंगा का जलस्तर 292.32 मीटर दर्ज किया। हालांकि चेतावनी निशान के नीचे होने के चलते अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी के निशान 293 मीटर से नीचे 292.32 मीटर पर चल रहा है। जलस्तर बढ़ने से गंगा के तटवर्तीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि जलस्तर की पल-पल की अपडेट ली जा रही है।
आंधी बारिश से 13 हजार हेक्टेअर धान में नुकसान
बारिश और आंधी से धान की फसल को क्षति पहुंची है। जनपद में 13 हजार हेक्टेअर धान की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि अभी अधिकारी नुकसान के आकलन करने को मैदान में नहीं उतरे हैं। लेकिन, उनकी मानें तो बीमित फसल वाले किसान को मुआवजा शीघ्र मिल जाएगा और अन्य किसान की फसल की रिपोर्ट राजस्व विभाग को भेज दी जाएगी। उनके मुआवजा के लिए शासन स्तर से धनराशि तय की जाएगी। किसान मायूस नजर आ रहे हैं, क्योंकि रोपने से लेकर अब तक अच्छी बारिश होने से धान की फसल ने अच्छी बाली अच्छी आई थी।
हरिद्वार के सभी गांवों में इस साल 13 हजार हेक्टेअर भूमि में धान की रोपाई हुई। ब्लॉक बहादराबाद के सहदेवपुर, सुभाषगढ़, दिनारपुर, डंडी अहमदपुर ग्रंट, अलीपुर, रोहालकी, आत्मलपुर बोंगला, बहादराबाद, खेड़ली के साथ पथरी, लक्सर, श्यामपुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, नारसन, खानुपर आदि क्षेत्रों के गांवों में धान की खेती के लिए क्षेत्र में मशहूर है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष धान बुआई के समय भरपूर बारिश होने से धान की अच्छी फसल होने की संभावना थी। उन्होंने बताया कि बुआई के बाद भी समय-समय पर आवश्यकता के अनुरूप हुई बरसात से धान की फसल में इस बार कीट पतंगों का प्रकोप भी कम देखने को मिल रहा था।
किसानों को इस बार फसल में कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल काम करना पड़ा था, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा था। किसानों ने बताया कि इस बार उचित समय पर हुई बारिश के कारण धान की फसल बहुत अच्छी होने की उम्मीद में सभी किसान बेहद खुश नजर आ रहे थे। लेकिन, अब शनिवार से सोमवार की देर शाम तक लगातार बारिश होने और तेज हवा चलने से अधिकतर धान की फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में बारिश का पानी भर गया है। किसानों को अधिक नुकसान की आशंका है।
धान की फसल गिरकर बरसाती पानी में डूबी
पिछले तीन दिन से लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल पानी में डूब गई। फसल का नुकसान होने की आशंका को लेकर किसानों की नींद उड़ गई है।
कई स्थानों पर खेतों में धान की फसल पक चुकी है। बारिश से पहले खेतों में धान की फसल की कटाई का कार्य चल रहा था। बारिश से धान की फसल की कटाई का कार्य रुक गया। रानीमाजरा, बादशाहपुर, नसीरपुरकलां, इब्राहिमपुर, एकड़ खुर्द, ऐथल, बहादरपुर जट, पथरी आदि स्थानों पर बारिश से खेतों में जलभराव होने से खेतों में धान की फसल पानी में डूब गई है। सुरेश चौहान, सुलेखचंद, सुशील कुमार, अनिल कुमार, मेहरबान आदि किसानों का कहना है कि लगातार बारिश से फसल पानी में डूब गई है। नुकसान की आशंका है।
बारिश और तेज हवा से हुए नुकसान की अब तक किसी भी क्षेत्र से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही नुकसान की जानकारी दी जाएगी। जिन किसानों की फसल का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कराया है। उन किसानों की धान की फसल बाढ़ या अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई है। वह किसान कृषि विभाग के निकटतम कार्यालय को सूचना दें, जिससे की किसानों की फसल की क्षतिपूर्ति हो सके।
- वीके यादव, जिला मुख्य कृषि अधिकारी
रविवार रात हुई बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है, क्योंकि इस समय धान के पौधों पर बाली आ जाने से दाना पड़ने लगता है। तेज हवाओं और बारिश के कारण पौधा गिर जाता है। इससे एक तो धान का दाना पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाता, दूसरा फसल गिर जाने से फंगस लग जाने से दाना ख़राब हो जाता है।
- पुरुषोत्तम कुमार, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र