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संवारा गया महाभारत काल के अक्षय वट वृक्ष का रूप
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:43 AM IST
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महाभारत
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कुरुक्षेत्र के अक्षय वट वृक्ष (बरगद) के संरक्षण का कार्य वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) ने पूरा कर लिया है।
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यह वही बरगद का पेड़ है जिसके संबंध में मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान इसी वृक्ष के नीचे अर्जुन को दिया था। देश भर से श्रद्धालु इस पेड़ के दर्शन के लिए आते हैं। कालांतर में इस पेड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। बाद में एफआरआई के विज्ञानियों ने इसे ट्रीटमेंट देकर दुरुस्त कर दिया है।
ज्योतिसर धाम स्थित अक्षय वट वृक्ष की स्थिति सुधारने के लिए कुरुक्षेत्र विकास प्राधिकरण ने अगस्त, 2014 में एफआरआई को प्रस्ताव दिया था। संस्थान के विज्ञानियों ने वर्ष 2015 से इस पर काम शुरू किया। इस दौरान वट वृक्ष की लटों को ट्रेंड करके जमीन में दबाया गया। इससे ये तने का रूप धारण कर लेंगी और वृक्ष में मजबूती आ जाएगी।
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कभी इसी तरह के ट्रीटमेंट से कोलाकाता बोटेनिकल गार्डन स्थित एशिया के सबसे बड़े वट वृक्ष को बचाया गया था। एफआरआई के समूह समन्वयक अनुसंधान डा. एनएसके हर्ष ने बताया कि लटों के तना बन जाने से पेड़ मजबूत हो जाता है। मुख्य तने के खोखला हो जाने पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन लटें जब तना बन जाती हैं तो पेड़ का अस्तित्व बचा रहता है।
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पेड़ की आयु बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अक्षय वट वृक्ष की शाखाओं पर रस्सी, धागे, घंटे-घड़ियाल बांधे जाने से जख्म हो गए थे। तने के चारों तरफ मार्बल फ्लोर बना देने से जड़ें ढंग से सांस नहीं ले पा रही थीं। इन्हें हटवा दिया गया। वट वृक्ष में अब नई वृद्धि हो रही है।