सभी अखाड़ों ने किया पायलट बाबा का बॉयकाट
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं संत समिति की चेतावनी का असर पायलट बाबा की शोभायात्रा पर पूरी तरह दिखा। किसी भी अखाड़े के पदाधिकारी, श्रीमहंत, महंत अथवा कोठारी ने शोभायात्रा में भाग नहीं लिया। पायलट बाबा के आश्रम में भी कोई अखाड़ा नहीं पहुंचा।
पायलट बाबा स्वयं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं। उन्होंने प्रयाग कुंभ में मां योगेश्वरानंद, मां श्रद्धा गिरि, मां चेतना गिरि को जूना अखाड़े से महामंडलेश्वर बनवाया था, उन्होंने अवश्य शोभायात्रा में भाग लिया। ये सभी महामंडलेश्वर बनने से पूर्व पायलट बाबा के शिष्य थे।
इनके अलावा अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी रसानंद तथा महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरि शोभायात्रा में शामिल हुए। ये दोनों उस महामंडलेश्वर परिषद के सदस्य हैं, जिसे पायलट बाबा और अर्जुन पुरी ने प्रयाग में खड़ा किया था। जूना अखाड़े से ही जुड़े स्वामी अर्जुन पुरी यज्ञ में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अखाड़ों ने कहा था, 'करेंगे सख्त कार्रवाई'
किसी भी अखाड़े के श्रीमहंतों द्वारा शोभायात्रा में न पहुंचना इस बात का परिचायक है कि आज भी समस्त अखाड़े इन संतों को निष्कासित मानते हैं।
अखाड़ा परिषद द्वारा किए गए बहिष्कार के कारण महामंडलेश्वर न तो प्रयाग कुंभ नहा पाए थे और न नासिक और उज्जैन के कुंभ नहा पाएंगे। अब देखना होगा कि गुरुवार से शुरू होने वाले यज्ञ में अखाड़ों और आश्रम के संत पहुंचते हैं अथवा नहीं।
इनका है कहना
अखाड़ा परिषद के बहिष्कार और कुछ महामंडलेश्वरों के निष्कासन को पूरे देश में स्वीकार किया गया है। यही वजह है कि पूरी अखाड़ा परिषद सभी जगह फैसले का सम्मान कर रही है। हमारे अखाड़े के जिन महामंडलेश्वरों ने बहिष्कृत संतों के साथ भूमिका निभाई उनके विरुद्ध जूना अखाड़े की कार्यकारिणी बैठक में निर्णय लिया जाएगा। शेष अखाड़ों से भी ऐसा ही आग्रह किया जाएगा।
-श्रीमहंत हरि गिरि, संरक्षक-जूना अखाड़ा, महामंत्री अखाड़ा परिषद।
जानिए, क्या है पायलट बाबा का विवाद
विगत प्रयाग कुंभ में कुछ अखाड़ों के महामंडलेश्वरों ने अलग से महामंडलेश्वर परिषद का गठन कर लिया था। पायलट बाबा और अर्जुन पुरी ने इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभाई।
इस पर कुंभ आदि मेलों में शाही स्नान का जिम्मा रखने वाली अखाड़ा परिषद ने तत्काल बैठक आयोजन कर महामंडलेश्वर परिषद को अवैध घोषित किया और पायलट बाबा सहित सभी पदाधिकारियों को अखाड़ों से निष्कासित कर दिया। यह घोषणा भी की गई कि उन सभी संतों का बहिष्कार किया जाएगा, जो महामंडलेश्वर परिषद में शामिल हुए।
महामंडलेश्वरों के कुंभ स्नान पर भी रोक लगा दी गई तथा महामंडलेश्वर प्रयाग कुंभ का स्नान नहीं कर पाए। मसला हल न हुआ तो इस वर्ष के नासिक कुंभ तथा अगले वर्ष के उज्जैन कुंभ में भी महामंडलेश्वरों का बहिष्कार जारी रहेगा और वे कुंभ स्नान नहीं कर पाएंगे। अखाड़ा परिषद के निर्णय को सम्मान देते हुए पायलट बाबा द्वारा बुधवार को हरिद्वार में निकाली गई शोभायात्रा में अखाड़े के किसी श्रीमहंत ने भाग नहीं लिया।