अजय भट्ट ने कहा, झूठ बोल रहे हैं सीएम
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आबकारी महकमे में एफएल-2 (विदेशी शराब स्टोर) स्टोर की संख्या लगभग 40 से घटाकर दो करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने केवल देहरादून और ऊधमसिंह नगर में स्टोर खोलने के शासनादेश आचार संहिता के दौरान करने का आरोप सीएम हरीश रावत पर लगाया है।
भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत एफएल 2 मार्च में घटाकर दो कर चुके हैं और उसके बाद झूठ बोलते रहे हैं कि ऐसा फैसला नहीं लिया गया है।
आपत्ति को धता बता दिया आदेश
नेता प्रतिपक्ष भट्ट ने गुरुवार को पार्टी प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि एफएल-2 स्टोर से शराब ठेके लाने वाले शराब खरीदते हैं, जिसके लिए प्रत्येक जनपद में कई शराब ब्रांड के स्टोर रखने का प्रावधान था।
28 फरवरी 2014 को आबकारी महकमे ने नीति की अधिसूचना जारी कर दी, लेकिन 26 मार्च 2014 को सीएम ने आबकारी विभाग के सचिव को पत्र लिखा कि स्टोर घटाकर दो कर दिए जाएं।
आबकारी महकमे के अधिकारियों ने सीएम के आदेश पर जो प्रस्ताव तैयार किया उसमें नीतिगत बदलाव को अवैधानिक ठहराया लेकिन सीएम नहीं माने।
29 मार्च को आबकारी विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया कि अब कुमाऊं मंडल के लिए ऊधमसिंह नगर और गढ़वाल मंडल के लिए देहरादून में एक-एक स्टोर होगा जहां से ठेकेदार रिटेल में बेचने के लिए शराब खरीदेंगे।
फंड जुटाने के लिए फैसला लेने का आरोप
इस मामले के सार्वजनिक होने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एफएल-2 की संख्या कम करने से कई बार अनभिज्ञता जताई। भट्ट का आरोप है कि सरकार ने लोकसभा चुनाव आचार संहिता दौरान यह फैसला करोड़ों का फंड जुटाने के लिए लिया है।
नियम तहत चुनाव के बाद कैबिनेट में लाकर आबकारी नीति में बदलाव किया जा सकता था, लेकिन सीएम की जल्दबाजी इशारा कर रही है कि उनकी मंशा साफ नहीं थी।
भट्ट ने कहा कि सीएम एक तरफ जनपदों में कैबिनेट की बात कर रहे हैं जबकि एक शराब कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए कैबिनेट बैठक बुला रहे हैं।
सीएम ने नहीं मानी अधिकारियों की
- बिना मंत्रिमंडल की सहमति के नीति में बदलाव से विधिक समस्याएं।
- अधिनियम 1910 की धारा 22 के नियम 2 अ में संशोधन अनिवार्य।
- स्टोर कम होने से एकाधिकार होगा जिससे ब्रांडों की उपलब्धता घटेगी।
- फुटकर दुकानों के जारी टेंडर में नहीं है दो स्टोर का प्रावधान
- फुटकर ठेकेदार विधिक रूप से मामले का कर सकते हैं विरोध।
- लोकसभा चुनाव आदर्श आचार संहिता 2014 का उल्लंघन संभव।
कांग्रेस ने आरोपों को नकारा
सरकार के हर कदम को माफियाओं के साथ जोड़कर देखने की भाजपा को आदत पड़ गई है। नेता प्रतिपक्ष को पहले तथ्यों की पूरी पड़ताल करनी चाहिए और उसके बाद ही कोई मामला उठाना चाहिए।
एफएल-2 के मामले को पहले कैबिनेट में लाया गया था। इस पर सबकी सहमति हुई थी और सरकार ने इसके बाद ही आदेश जारी किए। नेता प्रतिपक्ष के पास कोई पुख्ता सबूत हैं तो सामने लाएं वरना बयान देकर सस्ती लोकप्रियता को हासिल करने से बचें।
-सुरेंद्र कुमार, मीडिया समन्वयक