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हवा से चलेंगे ट्रेन, बस और कार!
अमर उजाला, ओमप्रकाश तिवारी, देहरादून
Updated Sun, 25 Aug 2013 09:37 AM IST
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देहरादून के सेलाकुई निवासी अतीक ने हवा से चलने वाला ऐसा इंजन बनाया है जिससे रेल भी चलाई जा सकती है। इस इंजन से कार-बाइक, ट्रक-बस चलाने के अलावा हवाई जहाज को भी उड़ाया जा सकता है।
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इस तकनीक को सेलाकुई निवासी अतीक अहमद ने दस वर्षों की मेहनत से ईजाद किया है। आठवीं तक पढ़े-लिखे अतीक को एअर सोर्स फोर्स इंजन बनाने में काफी पैसे खर्च करने पड़े हैं।
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40 लाख रुपये तो बैंक आफ बड़ौदा से ही कर्ज ले रखा है। यार-दोस्तों से भी पैसे उधार ले रखे हैं। अतीक बताते हैं कि उन्होंने हवा के दबाव से चलने वाले इंजन एअर सोर्स फोर्स को इसी साल छह मार्च को पेटेंट करा लिया है। जिसका पेटेंट नंबर है 648/del।
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पेटेंट कराने में एलएस डावर कंपनी ने सहयोग किया है। बताते हैं कि उन्होंने गुजरात की कंपनी मेपेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपनी तकनीक पांच करोड़ रुपये में इसी साल बेची थी।
पांच करोड़ के अलावा कंपनी अतीक को अपने सालाना मुनाफे का डेढ़ फीसदी रकम बतौर रायल्टी देना तय किया था। लेकिन कंपनी का दिया पांच करोड़ का चेक बाउंस हो गया है। इस वजह से अतीक आजकल काफी परेशान हैं।
दस हजार एचपी तक बन सकता है इंजन
अतीक ने बताया कि वह एअर सोर्स फोर्स तकनीक वाले इंजन को एक एचपी से दस हजार एचपी तक बना सकते हैं। जिसमें एक सिलेंडर से लेकर 20 सिलेंडर तक का प्रयोग किया जा सकता है। बताया कि पांच एचपी, 20 एचपी और 40 एचपी इंजन का विधिवत ट्रायल हो चुका है।
कैसे चलता है इंजन
एअर सोर्स फोर्स इंजन में एक हवा भर दी जाती है। उसके बाद वह उसी हवा को उपयोग करते हुए चलता है। बाहर से और किसी हवा की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी तकनीक ही हवा के दबाव से इंजन को चलाने की है। इंजन में एक बैटरी लगी होती है जिसकी वजह से यह स्टार्ट हो जाता है। उसके बाद हवा से ही चलता है। चलते इंजन से ही इसकी बैटरी रिचार्ज हो जाती है।
इंजन की खासियत
इस इंजन का ट्रेन में भी किया जा सकता है इस्तेमाल
एक एचपी से 10 हजार एचपी तक का बना सकते हैं इंजन
एक सिलेंडर से लेकर 20 सिलेंडर तक हो सकता है प्रयोग
पांच एचपी, 20 एचपी और 40 एचपी का हो चुका है ट्रायल
अतीक की प्रोफाइल
नाम - अतीक अहमद
जन्म तिथि : 03 अप्रैल 1965
विवाह : 12 सितंबर 1989
पिता का नाम : स्वर्गीय अख्तर अहमद
निवास : गांव हरिपुर, सेलाकुई, देहरादून
शिक्षा : आठवीं पास
अनुभव : वर्ष 1994 से दो वर्कशॉप चला रहे हैं।
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