{"_id":"fcf539788d396348e050c6d178596d45","slug":"agriculture-department-officer-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरक के नियंत्रण से बाहर हुआ कृषि विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरक के नियंत्रण से बाहर हुआ कृषि विभाग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 05 Oct 2014 04:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड कृषि विभाग में अधिकारियों ने व्यवस्था को ताक पर रख दिया है। गंभीर मसलों में भी विभागीय अफसर मंत्री से अनुमोदन के बजाय अपने स्तर पर ही कार्रवाई कर ले रहे हैं।
विज्ञापन
मंत्री को अवगत कराने की महज खानापूर्ति
मनचाहे कदम उठाने के बाद कार्रवाई से मंत्री को अवगत कराने की खानापूर्ति जरूर की जा रही है। अफसरों का यह रवैया ही कृषि मंत्री हरक सिंह रावत की नाराजगी की वजह रहा। किसी भी मामले में हाईकोर्ट में अपील करने से पहले विभागीय मंत्री का अनुमोदन जरूरी है।
विज्ञापन
लेकिन कृषि विभाग में अफसर खुद कार्रवाई करने के बाद मंत्री को दिखा रहे थे। जानकारी के मुताबिक लोक सेवा अधिकरण से कृषि विभाग के बर्खास्त कर्मचारी के पक्ष में फैसला आने के बाद कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कई बार अफसरों को पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
नियमानुसार मंत्री यह निर्देश न देते तो भी विभागीय अधिकारियों को अपील से पहले उनका अनुमोदन लेना चाहिए था। लेकिन संयुक्त सचिव देवेंद्र पालीवाल के पास मंत्री से अनुमोदन लेने का समय नहीं था। फाइल पर अपनी टिप्पणी में उन्होंने लिखा है कि ‘अपील का समय निकल रहा है।
मंत्री को अंधेरे में रखने का प्रयास
पहले अपील योजित की जाए, इसके बाद पत्रावली को कृषि मंत्री के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया जाए।’ सूत्रों के मुताबिक कृषि विभाग के अफसरों ने मामले में मंत्री को अंधेरे में रखने का प्रयास किया है।
सवाल यह है कि फाइल मंत्री के पास जाती तो अनुमोदन में कितना वक्त लगता। सूत्रों की मानें तो विभागीय अधिकारी जानते थे कि मंत्री के पास फाइल गई तो वे अपील योजित नहीं कर सकेंगे।